Edited By Pardeep,Updated: 25 Mar, 2026 06:54 AM

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका अपनी सैन्य ताकत लगातार बढ़ा रहा है। जानकारी के अनुसार, करीब 1,000 अमेरिकी सैनिकों को आने वाले दिनों में क्षेत्र में तैनात किया जा सकता है। ये सैनिक 82nd एयरबोर्न डिवीजन से जुड़े हैं और ईरान से जुड़े संभावित...
इंटरनेशनल डेस्कः मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका अपनी सैन्य ताकत लगातार बढ़ा रहा है। जानकारी के अनुसार, करीब 1,000 अमेरिकी सैनिकों को आने वाले दिनों में क्षेत्र में तैनात किया जा सकता है। ये सैनिक 82nd एयरबोर्न डिवीजन से जुड़े हैं और ईरान से जुड़े संभावित ऑपरेशनों के लिए तैयार रखे जा रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, इस दल में मेजर जनरल Brandon Tegtmeier, जो 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के कमांडर हैं, उनके साथ डिवीजन स्टाफ और 1st ब्रिगेड कॉम्बैट टीम की एक बटालियन शामिल है। यह यूनिट फिलहाल “Immediate Response Force (IRF)” के तौर पर काम कर रही है।
बताया गया है कि इस डिवीजन के शुरुआती हिस्से और बटालियन एक हफ्ते के भीतर तैनाती शुरू कर सकते हैं। वहीं, ब्रिगेड के अन्य हिस्सों को बाद में भेजा जा सकता है, हालांकि हालात के अनुसार इसमें बदलाव भी संभव है। यह ब्रिगेड मिडिल ईस्ट में “रेडी यूनिट” के तौर पर काम करेगी, यानी जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई के लिए तैयार रहेगी। इससे पहले भी 2020 में ईरानी कमांडर कासिम सुलेमानी की हत्या के बाद 82वीं एयरबोर्न डिवीजन को इसी तरह तैनात किया गया था।
IRF एक ऐसी विशेष ब्रिगेड होती है, जो बहुत कम समय के नोटिस पर तुरंत तैनात की जा सकती है। इसे तेज प्रतिक्रिया देने वाली सेना के रूप में जाना जाता है और इसकी जिम्मेदारी समय-समय पर अलग-अलग यूनिट्स को दी जाती है। सूत्रों के अनुसार, अभी तक आधिकारिक तैनाती आदेश जारी नहीं हुए हैं, लेकिन जल्द ही आदेश आने की संभावना है।
इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में 15 बिंदुओं पर सहमति बनी है और ईरान समझौता करने के लिए काफी इच्छुक है। हालांकि इससे पहले ईरान ने किसी भी तरह की बातचीत से इनकार किया था, लेकिन मंगलवार को एक ईरानी सूत्र ने संकेत दिए कि दोनों देशों के बीच संपर्क हो रहा है और ईरान “स्थायी समाधान” के प्रस्तावों पर विचार करने को तैयार है।
बातचीत के बावजूद, अमेरिका क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है। 82वीं एयरबोर्न के अलावा हजारों और सैनिकों को भी मिडिल ईस्ट भेजा जा रहा है।