Edited By Puneet Dogra,Updated: 04 Oct, 2026 11:33 AM

सऊदी अरब ने हूतियों पर मदीना के बिजलीघर को ड्रोन से निशाना बनाने का आरोप लगाया है। इससे पहले मक्का पर हमले की कोशिश का भी दावा किया गया था। हूतियों ने आरोपों से इनकार किया है। इस बीच सऊदी हवाई हमले तेज हैं और रियाद में सऊदी-पाकिस्तान-तुर्किये की...
Dubai: यमन के हूती लड़ाकों और सऊदी अरब के बीच जारी संघर्ष अब धार्मिक और सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। सऊदी अरब ने हूतियों पर इस्लाम के दूसरे सबसे पवित्र शहर मदीना के बिजलीघर को ड्रोन से निशाना बनाने का आरोप लगाया है। इससे कई इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की खबर है। इससे पहले मक्का पर भी ड्रोन हमले की कोशिश का आरोप लगाया गया था। हालांकि, हूतियों ने दोनों घटनाओं में अपनी भूमिका से इनकार किया है। इस बीच सऊदी अरब ने यमन में हवाई हमले तेज कर दिए हैं और अब इस संकट पर चर्चा के लिए सऊदी अरब, पाकिस्तान तथा तुर्किये के प्रतिनिधियों की उच्चस्तरीय बैठक होने जा रही है।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यमन के हूती लड़ाकों ने सऊदी अरब के पवित्र शहर मदीना में स्थित बिजलीघर पर ड्रोन हमला किया। हमले के कारण शहर के कई इलाकों में बिजली व्यवस्था बाधित होने की बात कही गई है। मदीना इस्लाम धर्म का दूसरा सबसे पवित्र शहर माना जाता है। यहां पैगंबर मोहम्मद की मस्जिद और उनकी कब्र स्थित है। दुनिया भर से हर साल लाखों मुस्लिम श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। सऊदी अरब सरकार का आरोप है कि हूतियों ने करीब दो सप्ताह पहले मक्का पर ड्रोन हमले की कोशिश की थी और अब मदीना को निशाना बनाया है। इन घटनाओं को लेकर कई मुस्लिम देशों ने चिंता और नाराजगी जताते हुए हमलों की निंदा की है। दूसरी ओर, हूती लड़ाकों ने मदीना पर हमला करने और मक्का पर हमले की कोशिश के आरोपों को खारिज किया है।
मदीना पर हमले के आरोपों के बीच सऊदी अरब ने यमन में अपनी सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है। सऊदी लड़ाकू विमानों ने हूतियों के नियंत्रण वाली राजधानी सना, तैज और अन्य इलाकों में ताजा हवाई हमले किए हैं। वहीं, हूती लड़ाकों और सऊदी समर्थित यमन की सरकारी सेना के बीच जमीन पर भी संघर्ष जारी है। एक महीने से चल रही इस लड़ाई में हूती कई रणनीतिक इलाकों पर कब्जा करने में सफल रहे हैं। ईरान समर्थित शिया हूती लड़ाकों ने सऊदी अरब और यमन की सरकारी सेना के सामने लगातार चुनौती पेश की है। इस संघर्ष का असर केवल यमन तक सीमित नहीं है। हूतियों ने लाल सागर के रास्ते सऊदी अरब के तेल टैंकरों और अन्य जहाजों की आवाजाही रोक रखी है। सऊदी अरब और उसके सहयोगी देश अब तक इस समुद्री मार्ग को अपने जहाजों के लिए पूरी तरह खुलवाने में सफल नहीं हो पाए हैं।
यमन संकट और सऊदी अरब पर हूतियों के हमलों के बीच मक्का सुरक्षा समझौते में शामिल देशों की उच्चस्तरीय बैठक अगले सप्ताह रियाद में होने जा रही है। इसमें सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री इशाक डार ने इस बैठक की जानकारी दी है। उनके मुताबिक, बैठक में यमन के हूती लड़ाकों की ओर से सऊदी अरब पर किए जा रहे हमलों और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी।