स्पेन में सिर्फ एक महिला किराएदार के कारण गिर गई सरकार, अब 8 महीने पहले होंगे चुनाव

Edited By Updated: 06 Oct, 2026 11:51 AM

spain govt collapses over eviction of 87 year old tenant

स्पेन में 87 वर्षीय मारिया डेल कारमेन अबास्कल की 70 साल पुराने घर से बेदखली ने आवास संकट को राजनीतिक मुद्दा बना दिया। सरकार के किराएदार राहत प्रस्ताव संसद में हार गए। इसके बाद प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज ने समय से आठ महीने पहले 29 नवंबर को आम चुनाव...

Madrid: स्पेन में एक 87 वर्षीय महिला की घर से बेदखली ने देश के गहराते आवास संकट को राजनीतिक संकट में बदल दिया है। मैड्रिड में करीब 70 साल से रह रहीं मारिया डेल कारमेन अबास्कल को घर से निकाले जाने के बाद हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। मामला इतना बड़ा हुआ कि सरकार ने किराएदारों को राहत देने के लिए आपात आवास उपाय संसद में पेश किए, लेकिन उन्हें बहुमत नहीं मिला। इसके बाद प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज ने 29 नवंबर 2026 को समय से करीब आठ महीने पहले आम चुनाव कराने की घोषणा कर दी। मामला 23 सितंबर को सामने आया, जब 87 वर्षीय मारिया डेल कारमेन अबास्कल को मैड्रिड के उस घर से बाहर निकाला गया, जहां उनका परिवार 1956 से किराए पर रह रहा था। उनके पिता ने यह मकान किराए पर लिया था और माता-पिता की मृत्यु के बाद मारिया वहीं किराएदार के तौर पर रहती रहीं।

 

2018 में इमारत का स्वामित्व बदल गया। इसके बाद किराए को लेकर विवाद शुरू हुआ। किराया पहले करीब 500 यूरो था, जिसे निवेश कंपनी ने बढ़ाकर 2,650 यूरो कर दिया। बाद में इसे घटाकर 1,650 यूरो किया गया, लेकिन यह राशि भी अबास्कल की पेंशन से काफी अधिक थी। उनकी मासिक पेंशन करीब 1,350 यूरो बताई गई है।कोर्ट में मामला जाने के बाद उन्हें घर से निकालने की कई कोशिशें भी हुईं। अंततः सितंबर में पुलिस की मौजूदगी में उन्हें उनके घर से बाहर निकाला गया। उनकी तबीयत खराब होने के कारण उन्हें स्ट्रेचर पर बाहर लाया गया। इस घटना की तस्वीरों और वीडियो ने पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया। अबास्कल की बेदखली के बाद मैड्रिड और स्पेन के दूसरे शहरों में बड़े प्रदर्शन हुए।

 

प्रदर्शनकारियों ने किराए पर नियंत्रण, कमजोर किराएदारों की सुरक्षा और बेदखली पर रोक की मांग की।हालांकि बाद में अबास्कल के मामले में मकान मालिक कंपनी के साथ समझौता हुआ और उनके घर लौटने का रास्ता खुल गया। समझौते के तहत उनका किराया उनकी आय के 30 प्रतिशत तक सीमित किया गया, यानी वह करीब 500 यूरो मासिक किराया देंगी। लेकिन तब तक उनका मामला पूरे स्पेन में आवास संकट के खिलाफ आंदोलन का प्रतीक बन चुका था।
 

सांचेज सरकार ने पेश किए दो आपात उपाय

  • बढ़ते दबाव के बीच प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज की सरकार ने किराएदारों को राहत देने के लिए दो आपात आवास प्रस्ताव संसद में रखे।
  • पहले प्रस्ताव में कमजोर किराएदारों को 2030 तक बेदखली से सुरक्षा देने, किराए में बढ़ोतरी पर नियंत्रण और संपत्ति बाजार में बड़े निवेशकों की भूमिका सीमित करने जैसे उपाय शामिल थे।
  • छोटे मकान मालिकों और किराएदारों को कर संबंधी राहत देने की भी योजना थी।
  • दूसरे प्रस्ताव में मौजूदा किराया समझौतों को आगे बढ़ाने की व्यवस्था थी, ताकि समझौता खत्म होते ही किराएदारों को मकान खाली करने या अचानक बढ़े किराए का सामना न करना पड़े।
  • लेकिन सांचेज सरकार के पास संसद में अपने दम पर बहुमत नहीं है।
  • 2 अक्टूबर को आवास संबंधी प्रस्तावों पर मतदान हुआ और सरकार को बड़ा झटका लगा।
  • निचले सदन में 350 में से 178 सांसदों ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। सरकार की पूर्व सहयोगी कैटेलोनिया की जुंत्स पार्टी ने भी इसका समर्थन नहीं किया।

 

विरोध करने वाली पार्टियों का तर्क था कि मकान मालिकों पर अतिरिक्त पाबंदियां लगाने से किराए के लिए उपलब्ध घरों की संख्या और घट सकती है। उनका कहना था कि अगर मकान मालिक बाजार से पीछे हटे तो किराएदारों के लिए उपलब्ध मकानों की कमी बढ़ेगी और इससे किराए और ऊपर जा सकते हैं। जुंत्स ने भी सरकार के प्रस्तावों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि ये उपाय आवास की कमी को दूर करने के बजाय बाजार को और सीमित कर सकते हैं। विपक्षी पीपुल्स पार्टी और वॉक्स ने भी सरकार के प्रस्तावों का समर्थन नहीं किया। आवास विधेयकों की हार सांचेज सरकार के सामने मौजूद अकेली समस्या नहीं थी। सरकार 2023 के बाद से नया पूर्ण बजट पारित कराने में भी मुश्किलों का सामना कर रही है। संसद में सरकार को क्षेत्रीय और छोटी पार्टियों के समर्थन पर निर्भर रहना पड़ता है। इसके अलावा भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों और प्रवासन जैसे मुद्दों को लेकर भी सरकार पर विपक्षी दबाव बना हुआ है। ऐसे माहौल में आवास संकट ने राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया।

 

 नवंबर को होंगे आम चुनाव
इन परिस्थितियों के बीच सांचेज ने 5 अक्टूबर को घोषणा की कि स्पेन में 29 नवंबर 2026 को आम चुनाव होंगे। चुनाव निर्धारित समय से करीब आठ महीने पहले कराया जा रहा है। सांचेज सरकार आवास संकट और किराएदारों की सुरक्षा को चुनावी बहस का महत्वपूर्ण मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है। इस चुनाव में आवास के अलावा अर्थव्यवस्था, प्रवासन, सार्वजनिक सेवाएं और क्षेत्रीय स्वायत्तता जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण रहेंगे। बता दें कि स्पेन में पिछले एक दशक में औसत किराया लगभग दोगुना हो चुका है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 2016 में किराया करीब 8.20 यूरो प्रति वर्ग मीटर था, जो 2026 में बढ़कर लगभग 15.10 यूरो प्रति वर्ग मीटर हो गया।सरकार के अनुसार स्पेन में किराए पर रहने वाले करीब 26 प्रतिशत लोग अपनी आय का औसतन 40 प्रतिशत हिस्सा किराए और उपयोगिता खर्च पर लगा रहे हैं। सार्वजनिक किराए के मकानों की हिस्सेदारी भी बेहद कम है । यह कुल आवास भंडार के 2 प्रतिशत से भी कम है, जबकि यूरोपीय संघ का औसत करीब 8 प्रतिशत है।यही वजह है कि 87 वर्षीय मारिया डेल कारमेन अबास्कल की कहानी सिर्फ एक बुजुर्ग किराएदार की बेदखली नहीं रही।  

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