Edited By Tanuja,Updated: 12 May, 2026 01:07 PM

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वेनेजुएला को “अमेरिका का 51वां राज्य” बनाने वाले बयान पर वेनेजुएला ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने साफ कहा कि देश अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा। एसेक्विबो क्षेत्र विवाद और...
International Desk: डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ऐसा बयान दिया है जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचाल ला दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कथित तौर पर कहा है कि वह वेनेजुएला को अमेरिका का “51वां राज्य” बनाने पर “गंभीरता से विचार” कर रहे हैं। फॉक्स न्यूज के पत्रकार जॉन रॉबर्ट्स के मुताबिक ट्रंप ने फोन पर बातचीत में कहा कि वेनेजुएला के पास करीब 40 ट्रिलियन डॉलर का तेल भंडार है और वहां के लोग “ट्रंप को पसंद करते हैं।”
वेनेजुएला का दो टूक जवाब
ट्रंप के बयान पर वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज़ Delcy Rodríguez ने तीखी प्रतिक्रिया दी। हेग में International Court of Justice के बाहर उन्होंने कहा, “ ट्रंप ऐसा सोचें भी मत क्योंकि वेनेजुएला कोई उपनिवेश नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र देश है। हम अपनी संप्रभुता, इतिहास और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करते रहेंगे।” इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि जनवरी 2026 में हुए अमेरिकी सैन्य अभियान से जुड़ी है, जब पूर्व राष्ट्रपति Nicolás Maduro और उनकी पत्नी को अमेरिकी बलों ने गिरफ्तार कर लिया था। उन पर ड्रग तस्करी और नार्को-टेररिज्म से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। मादुरो की गिरफ्तारी के बाद डेल्सी रोड्रिगेज कार्यवाहक राष्ट्रपति बनीं और उन्होंने तेल क्षेत्र में विदेशी निवेश को बढ़ावा देना शुरू किया। इसी दौरान अमेरिका ने भी वेनेजुएला के तेल सेक्टर पर कुछ प्रतिबंधों में ढील दी।
तेल का खेल
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की नजर वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार पर है। फॉक्स न्यूज से जुड़े सूत्रों के अनुसार ट्रंप ने साफ कहा कि वेनेजुएला की तेल संपदा अमेरिका के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। यह बयान ऐसे समय आया है जब वेनेजुएला और Guyana के बीच एसेक्विबो क्षेत्र को लेकर विवाद भी तेज है। इस क्षेत्र में भारी मात्रा में तेल और प्राकृतिक संसाधन मौजूद हैं।
कनाडा के बाद अब वेनेजुएला
ट्रंप इससे पहले Canada को भी “51वां अमेरिकी राज्य” बनाने को लेकर बयान दे चुके हैं। हालांकि वेनेजुएला वाला बयान ज्यादा गंभीर माना जा रहा है क्योंकि इसमें अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप, तेल राजनीति और सत्ता परिवर्तन जैसे मुद्दे भी जुड़े हुए हैं। ट्रंप के इस बयान के बाद सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक हलकों में तीखी बहस शुरू हो गई है। कई विशेषज्ञ इसे अमेरिका की आक्रामक विदेश नीति और लैटिन अमेरिका में बढ़ते प्रभाव की रणनीति के तौर पर देख रहे हैं।