8th Pay Commission: पूरे देश में सरकारी कर्मचारी 12 फरवरी को हड़ताल पर, रेलवे से लेकर बैंक तक सेवाएं होंगी प्रभावित

Edited By Updated: 31 Jan, 2026 12:33 PM

8th pay commission central employees to go on strike on february 12

फरवरी का महीना केंद्रीय कर्मचारियों के लिए काफी गहमागहमी भरा रहने वाला है। अगर आप सरकारी दफ्तरों या बैंकिंग सेवाओं से जुड़े काम निपटाने की सोच रहे हैं, तो 12 तारीख का कैलेंडर मार्क कर लीजिए। देश के लाखों सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स अपनी मांगों को...

नेशनल डेस्क: फरवरी का महीना केंद्रीय कर्मचारियों के लिए काफी गहमागहमी भरा रहने वाला है। अगर आप सरकारी दफ्तरों या बैंकिंग सेवाओं से जुड़े काम निपटाने की सोच रहे हैं, तो 12 तारीख का कैलेंडर मार्क कर लीजिए। देश के लाखों सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स अपनी मांगों को लेकर हुंकार भर रहे हैं। 'सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज एंड वर्कर्स' यानी CCGEW ने साफ कर दिया है कि अगर उनकी बात नहीं मानी गई, तो 12 फरवरी 2026 को पूरे देश में सरकारी कामकाज की रफ्तार थम सकती है।

इस बड़े आंदोलन के पीछे मुख्य वजह 8वें वेतन आयोग के नियम और पुरानी पेंशन योजना को लेकर सरकार का अड़ियल रुख बताया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि वेतन आयोग की शर्तों में उनके हितों का ध्यान नहीं रखा जा रहा है, इसलिए अब वे आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। कैबिनेट सेक्रेटरी को पहले ही इस बारे में चेतावनी भरा नोटिस भेजा जा चुका है।

क्या हैं कर्मचारियों की मुख्य मांगें?
कर्मचारियों की मांगों की फेहरिस्त लंबी है, जिसमें सबसे ऊपर सैलरी और पेंशन का मुद्दा है। वे चाहते हैं कि वेतन आयोग के नियमों में बदलाव कर उनके सुझावों को शामिल किया जाए। साथ ही, 1 जनवरी 2026 से बेसिक सैलरी और पेंशन में 20 फीसदी की तत्काल राहत की मांग की जा रही है। एक और बड़ा मुद्दा महंगाई भत्ते का है; कर्मचारियों की मांग है कि जब महंगाई भत्ता 50 फीसदी तक पहुंच जाए, तो उसे मूल वेतन में जोड़ दिया जाए। साथ ही, कोरोना काल के दौरान रोका गया 18 महीनों का बकाया पैसा भी उन्हें तुरंत चाहिए।

पेंशन के मोर्चे पर भी कर्मचारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। वे नई पेंशन व्यवस्था और हालिया 'यूनिफाइड पेंशन स्कीम' को पूरी तरह खत्म कर पुरानी पेंशन योजना (OPS) को वापस लाना चाहते हैं। इसके अलावा, पेंशन से जुड़ी कुछ तकनीकी शर्तों में भी ढील की मांग की जा रही है, जैसे कि पेंशन की कटौती की भरपाई 15 साल के बजाय 11 साल में ही कर दी जाए।

रोजगार और अन्य बड़े मुद्दे
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि विभागों में जो पद खाली पड़े हैं, उन्हें तुरंत भरा जाए और ठेके पर काम देने या निजीकरण की प्रक्रिया पर लगाम लगे। वे चाहते हैं कि लेबर कोड के नए कानूनों को रद्द किया जाए और ग्रामीण डाक सेवकों को पक्का कर्मचारी माना जाए। न्यूनतम पेंशन को भी बढ़ाकर 9000 रुपये करने की बात कही जा रही है।

आम जनता पर क्या होगा असर?
अगर यह हड़ताल होती है, तो इसका सीधा असर बैंकों, डाकघरों और उन तमाम सरकारी दफ्तरों पर पड़ेगा जिनसे आम आदमी का रोज का वास्ता पड़ता है। चूंकि इस विरोध प्रदर्शन में कई बैंक यूनियनें भी शामिल हो रही हैं, इसलिए पैसों के लेन-देन और चेक क्लीयरेंस जैसे काम अटक सकते हैं। कुल मिलाकर, यह हड़ताल सरकार और कर्मचारियों के बीच एक बड़े टकराव का संकेत दे रही है।

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