Edited By Ramanjot,Updated: 16 Mar, 2026 05:56 PM

आठवें वेतन आयोग की सुगबुगाहट के बीच केंद्र सरकार ने राज्यसभा में स्पष्ट किया है कि केंद्रीय स्वायत्त संस्थानों (Autonomous Bodies) के कर्मचारियों को पति-पत्नी के आधार पर एक ही स्टेशन पर पोस्टिंग देने का फिलहाल कोई नया प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
8th Pay Commission: देशभर के सैकड़ों केंद्रीय स्वायत्त संस्थानों (Autonomous Bodies) में कार्यरत हजारों कर्मचारियों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। केंद्र सरकार ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब के दौरान यह साफ कर दिया है कि स्वायत्त संस्थानों के कर्मचारियों के लिए 'स्पाउस ग्राउंड' (पति-पत्नी नीति) पर एक ही स्टेशन पर पोस्टिंग देने की कोई योजना फिलहाल नहीं है।
राज्यसभा में सरकार का पक्ष
कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रो. मनोज कुमार झा के एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि 30 सितंबर 2009 के DoPT आदेश के तहत पति-पत्नी को एक स्टेशन पर रखने के निर्देश केवल उन मामलों में लागू होते हैं, जहां कम से कम एक साथी केंद्रीय सरकारी सेवा (Central Government Service) में हो। सरकार ने कड़े शब्दों में स्पष्ट किया कि इस नीति का विस्तार केंद्रीय वित्तपोषित स्वायत्त या वैधानिक निकायों (Statutory Bodies) तक करने का कोई विचार नहीं है।
कर्मचारी संगठनों में भारी रोष
सरकार के इस रुख पर ऑल इंडिया एनपीएस इंप्लॉईज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इसे 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
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डॉ. पटेल के मुख्य तर्क
डॉ. पटेल ने कहा कि जब IAS, IPS और अन्य कैडर के अधिकारियों को स्पाउस ग्राउंड पर ट्रांसफर मिल सकता है, तो स्वायत्त संस्थानों के कर्मचारियों के साथ भेदभाव क्यों...जब देश 'वन नेशन-वन राशन' और 'वन नेशन-वन पेंशन' की ओर बढ़ रहा है, तो कर्मचारियों के लिए समान ट्रांसफर नीति क्यों नहीं बन सकती? उन्होंने कहा कि इस नीति के अभाव में हजारों दंपत्ति सालों से अलग-अलग शहरों में रहने को मजबूर हैं, जिससे उनकी कार्यक्षमता और पारिवारिक जीवन प्रभावित हो रहा है।
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आठवें वेतन आयोग से पहले समाधान की मांग
कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि आठवें वेतन आयोग के लागू होने से पहले सरकार को इन विसंगतियों को दूर करना चाहिए। स्वायत्त संस्थानों के कर्मचारी लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि उन्हें भी केंद्रीय कर्मचारियों की तर्ज पर स्पाउस पोस्टिंग और अन्य सुविधाएं प्रदान की जाएं।