Edited By Parveen Kumar,Updated: 17 Jan, 2026 06:10 PM

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के हरख विकासखंड स्थित कंपोजिट स्कूल उदवापुर में शनिवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब स्कूल परिसर के भीतर ही एक महिला शिक्षिका ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतका की पहचान उमा वर्मा (40) के रूप में हुई है, जो इसी स्कूल...
नेशनल डेस्क: उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के हरख विकासखंड स्थित कंपोजिट स्कूल उदवापुर में शनिवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब स्कूल परिसर के भीतर ही एक महिला शिक्षिका ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतका की पहचान उमा वर्मा (40) के रूप में हुई है, जो इसी स्कूल में असिस्टेंट टीचर के पद पर तैनात थीं। घटना की खबर मिलते ही स्कूल स्टाफ, ग्रामीणों और शिक्षा विभाग में अफरा-तफरी मच गई।
स्कूल में फंदे से लटका मिला शव
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, स्कूल परिसर में ही उमा वर्मा का शव फंदे से लटका हुआ मिला। जानकारी फैलते ही आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए। स्कूल प्रशासन ने तुरंत पुलिस और शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को सूचना दी। सतरिख थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है।
दो बच्चों की मां थीं उमा वर्मा
उमा वर्मा दो बच्चों की मां थीं और अपने परिवार के साथ जलालपुर गांव में रहती थीं। उनके पति ऋषि वर्मा भी शिक्षा विभाग में असिस्टेंट टीचर हैं और सिद्धौर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय टेण्ड़वां गांव में तैनात हैं। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और स्तब्धता का माहौल है। सहकर्मी और स्थानीय लोग इस बात को लेकर हैरान हैं कि आखिर ऐसी कौन-सी मजबूरी रही होगी, जिसने एक शिक्षिका को इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
पति का आरोप: ढाई साल से चल रही थी मानसिक प्रताड़ना
मृतका के पति ऋषि वर्मा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि स्कूल का स्टाफ पिछले ढाई साल से उनकी पत्नी को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था। उनका कहना है कि जब उमा मन लगाकर बच्चों को पढ़ाती थीं, तो स्टाफ के कुछ लोग उन पर तंज कसते और टीका-टिप्पणी करते थे। कई बार पूरे स्टाफ ने मिलकर उनके खिलाफ शिकायतें भी कीं। वे लगातार ट्रांसफर की कोशिश कर रहे थे, लेकिन तबादला नहीं हो सका।
समय पर इलाज मिलता तो बच सकती थी जान?
पति ने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षकों ने उन्हें फंदे से लटका देखा, लेकिन समय रहते न तो नीचे उतारा गया और न ही इलाज के लिए ले जाया गया। उनका कहना है कि अगर समय पर इलाज मिल जाता, तो शायद उनकी पत्नी की जान बच सकती थी। उन्होंने बताया कि घटना वाले दिन सुबह करीब 10:30 बजे उनकी पत्नी से बात हुई थी और उस समय वह न तो परेशान लग रही थीं और न ही किसी अनहोनी का संकेत मिला था।
भाई ने भी लगाए गंभीर आरोप
मृतका के भाई शिवाकांत वर्मा ने बताया कि उनकी बहन पूरी लगन से बच्चों को पढ़ाती थीं, लेकिन इसी बात को लेकर स्कूल स्टाफ उन्हें निशाना बनाता था। लोग कहते थे कि “बहुत बड़ी पढ़ाने वाली हैं, इन्हें अवार्ड चाहिए।” उन्होंने आरोप लगाया कि सहायक अध्यापक सुशील वर्मा और स्कूल इंचार्ज सीतावती, जया और अर्चना उन्हें लगातार परेशान करते थे। शिवाकांत ने मामले को संदिग्ध बताते हुए कहा कि जिस कमरे में फांसी लगाई गई, उसका दरवाजा अंदर से बंद नहीं था। आरोप है कि पुलिस को बुलाने से पहले स्कूल स्टाफ ने वहां की चीजों को ठीक किया।
जांच का भरोसा, कार्रवाई का आश्वासन
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी नवीन कुमार पाठक ने घटना को बेहद दुखद बताया है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच पुलिस कर रही है और यदि किसी की भी भूमिका संदिग्ध या दोषपूर्ण पाई जाती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।