संस्कृत विद्वानों को विदेशों में भेजने का कार्य करेगी अकादमी

Edited By Updated: 06 Feb, 2023 06:28 PM

academy will work to send sanskrit scholars abroad

संस्कृत विद्वानों को विदेशों में भेजने का कार्य करेगी अकादमी


चंडीगढ़ , 6 फरवरी -  (अर्चना सेठी)  हरियाणा संस्कृत अकादमी के निदेशक डॉ.दिनेश शास्त्री ने कहा है कि संस्कृत पढऩे वाले छात्र रोजगार से वंचित न रहें ,इसके लिए संस्कृत अकादमी विशेष योजना क्रियान्वित करने जा रही है। इसके साथ ही संस्कृत विद्वानों को विदेशों में भेजने का कार्य भी किया जाएगा। इससे न केवल वे रोजगार लाभ प्राप्त कर सकेंगे, वहीं विदेशों में संस्कृत की विजय पताका को फहराने का कार्य करेंगे।


       डॉ. शास्त्री सोमवार को भिवानी में श्री हरियाणा शेखावाटी ब्रह्मचार्य आश्रम संस्कृत महाविद्यालय में आयोजित संस्कृत संभाषण शिविर के समापन पर संस्कृत छात्रों को सम्बोधित कर रहे थे। साहित्याचार्य सुनील शास्त्री के संयोजन में 21 दिन तक चले इस शिविर में 100 से अधिक छात्रों ने संस्कृत सम्भाषण की शिक्षा ग्रहण की।


    अपने संबोधन में डॉ.दिनेश शास्त्री ने कहा कि संस्कृत भाषा का जो रूप आज मिलता है, वही एक हजार वर्ष पूर्व था।  संस्कृत का स्वरूप पूर्णत: वैज्ञानिक है।  इसका व्याकरण पूर्णत: तार्किक और सुपरिभाषित है। उन्होंने कहा कि भिवानी को छोटी काशी का दर्जा प्राप्त है। संस्कृत के प्रचार प्रसार में यहां का बहुत बड़ा योगदान रहा है। यहां के संस्कृत विद्वान् ख्याति प्राप्त हैं। सम्भाषण शिविर के माध्यम से यहां के लोगों में संस्कृत के प्रति समर्पण भावना जागृत करना हमारा प्रमुख उद्देश्य है। संस्कृत अकादमी हरियाणा में संस्कृत के प्रचार प्रसार में लगातार सक्रिय भूमिका निभा रही है। संस्कृत साहित्यकारों के सम्मान राशि में साढ़े तीन गुना तक बढ़ोतरी करने का सरकार ने ऐतिहासिक काम किया है। गुरुकुलों को शिक्षा बोर्ड से मान्यता दिलाने के साथ साथ केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय से विशेष ग्राण्ट दिलवाने में अकादमी का योगदान रहा है। प्रदेश के गुरुकुलों को एक मंच पर लाकर उन्हें और भी मूलभूत सुविधाएं दिलवाने के लिए हरियाणा सरकार के समक्ष अकादमी लगातार प्रयासरत है।


हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड भिवानी के संयुक्त सचिव डॉ. पवन शर्मा ने कहा कि भारत की संस्कृति संस्कृत में ही समाहित है। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड भिवानी आगामी सत्र से हिंदी, अंग्रेजी के साथ संस्कृत को तीसरी भाषा के रूप में लागू करने जा रहा है। इससे संस्कृत वैकल्पिक भाषा न होकर मुख्य धारा में शामिल हो जाएगी। छात्र संस्कृत को भी मुख्य विषय के रूप में शामिल कर शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे।

 

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