Edited By Tanuja,Updated: 07 Jan, 2026 07:46 PM

एलोपेसिया से पीड़ित 27 वर्षीय महिमा घई ने बिना बालों के दुल्हन बनकर सामाजिक धारणाओं को चुनौती दी। लंबे इलाज, तानों और मानसिक संघर्ष के बावजूद उन्होंने आत्मस्वीकृति को चुना। उनकी कहानी आत्मविश्वास, प्रेम और सच्ची सुंदरता का प्रेरक संदेश देती है।
International Desk: आज के दौर में जहां सुंदरता को लंबे और घने बालों से जोड़ा जाता है, वहीं 27 वर्षीय महिमा घई ने इन सभी सामाजिक धारणाओं को चुनौती देते हुए दुनिया में एक नई मिसाल कायम की है। महिमा की शादी की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें वह बिना बालों के एक आत्मविश्वासी और खूबसूरत दुल्हन के रूप में नजर आ रही हैं।महिमा को महज दो साल की उम्र में एलोपेसिया नामक एक लाइलाज ऑटोइम्यून बीमारी का पता चला, जिसके कारण उनके बाल पूरी तरह झड़ गए।
पंजाबी परिवार से होने के कारण, जहां बालों को सुंदरता का अहम प्रतीक माना जाता है, उनके माता-पिता भविष्य को लेकर बेहद चिंतित थे। इलाज के लिए आयुर्वेद, होम्योपैथी और एलोपैथी सभी का सहारा लिया गया। आठवीं से ग्यारहवीं कक्षा तक उन्हें हर हफ्ते सिर में करीब 300 इंजेक्शन लगाए गए, जिनके गंभीर दुष्प्रभाव सामने आए। उनका वजन बढ़कर 110 किलो हो गया और शरीर पर स्ट्रेच मार्क्स पड़ गए।
तानों और मज़ाक का सामना करना पड़ा
महिमा बताती हैं कि स्कूल और कॉलेज के दिनों में उन्हें तानों और मज़ाक का सामना करना पड़ा। कॉलेज में एक नाटक के दौरान गलती से उनकी विग उतर गई, जिससे वह बेहद शर्मिंदा हो गईं और काफी देर तक बाथरूम में छिपकर रोती रहीं।लेकिन उसी दिन उन्होंने फैसला किया कि अब उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनना होगा और खुद को स्वीकार करना होगा। महिमा की जिंदगी में बड़ा मोड़ तब आया जब उनके जीवन में शशांक आए। शशांक ने महिमा को उसी रूप में स्वीकार किया जैसी वह हैं। उन्होंने महिमा को विग उतारने के लिए प्रेरित किया, क्योंकि रोज़ाना 10 घंटे विग पहनने से उन्हें सिरदर्द, पसीना और खुजली की समस्या होती थी।शशांक के सुझाव पर महिमा ने कैप पहनना शुरू किया और आज उनके पास करीब 1000 कैप्स का कलेक्शन है।

“मैं जैसी हूं, वैसी ही पूरी हूं”
महिमा के मुताबिक, शादी के दिन भी कुछ रिश्तेदारों और मेहमानों ने कहा,“सब कुछ बहुत अच्छा था, अगर विग लगा लेतीं तो और बेहतर होता।”सोशल मीडिया पर भी कुछ लोगों ने नकारात्मक टिप्पणियां कीं, लेकिन महिमा का साफ कहना है कि विग पहनकर वह अपनी असली पहचान खो देतीं।आज महिमा पूरे आत्मविश्वास के साथ कहती हैं कि अगर भगवान भी उन्हें बाल लौटाने का प्रस्ताव दें, तो वह उसे स्वीकार नहीं करेंगी। उनका मानना है कि वह बिना बालों के भी खूबसूरत हैं और यही चीज उन्हें दूसरों से अलग बनाती है।
सोशल मीडिया पर मिल रही सराहना
महिमा का यह कदम दुनिया को यह संदेश देता है कि एक महिला की सुंदरता उसके बालों की मोहताज नहीं होती।महिमा की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर लाखों लोगों को प्रेरित कर रही हैं। लोग उनकी हिम्मत और आत्मविश्वास की जमकर तारीफ कर रहे हैं। एक यूज़र ने लिखा-“सुंदरता बालों में नहीं, खुद को स्वीकार करने में होती है।” महिमा की पोस्ट की सबसे प्रभावशाली पंक्ति रही-“चाहे बाल हों या न हों, मैं कभी अधूरी नहीं थी।”