Edited By Parveen Kumar,Updated: 16 Mar, 2026 07:10 PM

पहले दिल से जुड़ी बीमारियों को आमतौर पर उम्र बढ़ने के साथ होने वाली समस्या माना जाता था। माना जाता था कि 50 या 60 साल के बाद ही हार्ट अटैक, आर्टरी ब्लॉकेज या अन्य कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों का खतरा ज्यादा बढ़ता है। लेकिन अब डॉक्टरों का कहना है कि...
नेशनल डेस्क : पहले दिल से जुड़ी बीमारियों को आमतौर पर उम्र बढ़ने के साथ होने वाली समस्या माना जाता था। माना जाता था कि 50 या 60 साल के बाद ही हार्ट अटैक, आर्टरी ब्लॉकेज या अन्य कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों का खतरा ज्यादा बढ़ता है। लेकिन अब डॉक्टरों का कहना है कि हाल के वर्षों में यह स्थिति तेजी से बदल रही है। आजकल कई युवाओं में 30 की उम्र के आसपास ही धमनियों में कमजोरी या सख्त होने के शुरुआती संकेत दिखाई देने लगे हैं, जो आगे चलकर दिल की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
शरीर में क्या काम करती हैं आर्टरीज
आर्टरीज यानी धमनियां दिल से ऑक्सीजन युक्त खून को शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने का काम करती हैं। सामान्य स्थिति में ये धमनियां लचीली होती हैं, जिससे रक्त का प्रवाह सुचारु रूप से चलता रहता है। लेकिन जब किसी कारण से ये धीरे-धीरे सख्त या संकरी होने लगती हैं तो खून का बहाव प्रभावित हो सकता है। ऐसी स्थिति में दिल को रक्त पंप करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे समय के साथ हार्ट डिजीज, स्ट्रोक और अन्य कार्डियोवैस्कुलर समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
डॉक्टरों ने जताई चिंता
दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल के कार्डियोथोरेसिक और वैस्कुलर सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. मुकेश गोयल के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में कम उम्र में धमनियों के सख्त होने के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। उनका कहना है कि पहले यह समस्या आमतौर पर 50–60 साल की उम्र में सामने आती थी, लेकिन अब बदलती जीवनशैली के कारण 30 साल के युवाओं में भी इसके लक्षण दिखाई देने लगे हैं।
लाइफस्टाइल बन रही बड़ी वजह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक जीवनशैली इस समस्या के पीछे प्रमुख कारण बनती जा रही है। लंबे समय तक बैठे रहकर काम करना, मानसिक तनाव, नींद की कमी और ज्यादा मात्रा में प्रोसेस्ड फूड का सेवन शरीर की रक्त वाहिकाओं पर नकारात्मक असर डाल सकता है। इसके अलावा धूम्रपान, मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और असंतुलित आहार भी धमनियों को समय से पहले कमजोर या सख्त बना सकते हैं। कई मामलों में शुरुआत में कोई बड़ा लक्षण नजर नहीं आता, लेकिन बढ़ता कोलेस्ट्रॉल, हल्का ब्लड प्रेशर, जल्दी थकान या थोड़ी मेहनत में सांस फूलना जैसे संकेत इस ओर इशारा कर सकते हैं।
बचाव के लिए क्या करें
डॉक्टरों का मानना है कि कम उम्र से ही दिल की सेहत पर ध्यान देना जरूरी है। इसके लिए समय-समय पर कोलेस्ट्रॉल जांच, ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग और ब्लड शुगर टेस्ट करवाना फायदेमंद हो सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रोजाना नियमित व्यायाम या तेज चाल से टहलना, फल और हरी सब्जियों से भरपूर संतुलित आहार लेना, नमक और जंक फूड कम करना, धूम्रपान से दूरी बनाना और पर्याप्त नींद लेना दिल को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभा सकता है।