लद्दाख के लोगों से किए वादे से पीछे हट रही है भाजपा: कांग्रेस

Edited By Updated: 13 Oct, 2025 02:37 PM

bjp going back on its promises to the people of ladakh congress

कांग्रेस ने सोमवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने लद्दाख को छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा देने का वादा किया था, लेकिन अब उसे पूरा करने से पीछे हट रही है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने मंगोलिया के राष्ट्रपति खुरेलसुख उखना के...

नेशनल डेस्क: कांग्रेस ने सोमवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने लद्दाख को छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा देने का वादा किया था, लेकिन अब उसे पूरा करने से पीछे हट रही है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने मंगोलिया के राष्ट्रपति खुरेलसुख उखना के भारत दौरे का उल्लेख करते हुए भाजपा पर निशाना साधा। रमेश ने ‘एक्स' पर पोस्ट किया, "मंगोलिया के राष्ट्रपति आज एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ नयी दिल्ली पहुंच चुके हैं। भारत और मंगोलिया के बीच राजनयिक संबंध दिसंबर 1955 में स्थापित हुए थे। भारत ने अक्टूबर 1961 में मंगोलिया को संयुक्त राष्ट्र में शामिल कराने में अहम भूमिका निभाई थी।"

उन्होंने कहा, "इस रिश्ते में निर्णायक मोड़ तब आया, जब प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अक्टूबर 1989 में लद्दाख के अत्यंत लोकप्रिय एवं सम्मानित बौद्ध भिक्षु 19वें कुशोक बकुला रिनपोछे को मंगोलिया में भारत का राजदूत नियुक्त किया। उन्होंने जनवरी 1990 में पदभार संभाला और असामान्य रूप से दस वर्षों तक वहाँ भारत के राजदूत रहे।" रमेश के अनुसार, 1990 में साम्यवाद के पतन के बाद मंगोलिया को उसकी बौद्ध विरासत से दोबारा जोड़ने और उसे पुनर्जीवित करने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। उनका कहना है कि मंगोलिया में आज भी रिनपोछे को एक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व के रूप में सम्मानपूर्वक स्मरण किया जाता है।

कांग्रेस महासचिव ने कहा, "10 जून 2005 को तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने लेह हवाई अड्डे का नाम बदलकर कुशोक बकुला रिनपोछे हवाई अड्डा रखा और उन्हें “आधुनिक लद्दाख के शिल्पकार” के रूप में सम्मानित किया।" रमेश ने कहा, "बौद्ध धर्म का पुनर्जागरण- न केवल मंगोलिया और पूर्व सोवियत संघ में, बल्कि भारत में भी -काफ़ी हद तक रिनपोछे के प्रयासों का परिणाम है।" उन्होंने कहा, " आज 19वें कुशोक बकुला रिनपोछे का लद्दाख, देश से मरहम की प्रतीक्षा कर रहा है, ख़ास तौर पर उस पार्टी के नेतृत्व से जिसने 2020 के स्थानीय पर्वतीय परिषद के चुनावों के अपने घोषणापत्र में छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा का वादा किया था, लेकिन अब वह सत्ता में हो कर भी उसे पूरा करने से पीछे हट रही है।" 

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