Edited By Pardeep,Updated: 14 Jan, 2026 06:14 AM

देश में फटाफट डिलीवरी देने वाली कंपनियों को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया की सख्त चेतावनी के बाद Blinkit ने अपने सभी प्लेटफॉर्म से “10 मिनट में डिलीवरी” वाला दावा हटा दिया है। अब Swiggy, Zomato...
नेशनल डेस्कः देश में फटाफट डिलीवरी देने वाली कंपनियों को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया की सख्त चेतावनी के बाद Blinkit ने अपने सभी प्लेटफॉर्म से “10 मिनट में डिलीवरी” वाला दावा हटा दिया है। अब Swiggy, Zomato और Zepto भी जल्द ही अपने ऐप, विज्ञापन और सोशल मीडिया से यह टाइम लिमिट हटाने जा रहे हैं।
सरकार ने क्यों लिया सख्त फैसला?
श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने Blinkit, Swiggy, Zomato और Zepto के अधिकारियों के साथ बैठक की थी। बैठक में उन्होंने साफ कहा –“इतनी सख्त डिलीवरी टाइम लिमिट से डिलीवरी बॉय की जान को खतरा होता है। वे जल्दी के चक्कर में तेज रफ्तार से बाइक चलाते हैं और हादसे होते हैं।” सरकार ने कंपनियों से कहा कि वे ग्राहकों को तय समय में डिलीवरी का दबाव दिखाना बंद करें, ताकि वर्कर्स सुरक्षित रह सकें।
Blinkit ने तुरंत हटा दिया 10 मिनट वाला दावा
सरकार की सलाह के बाद Blinkit ने तुरंत अपने सभी ब्रांड प्लेटफॉर्म, ऐप, वेबसाइट और सोशल मीडिया से “10 मिनट में डिलीवरी” का टैगलाइन हटा दिया। Swiggy, Zomato और Zepto ने भी सरकार को भरोसा दिया है कि वे जल्द ही यही बदलाव करेंगे।
डिलीवरी बॉय की सुरक्षा सबसे बड़ा कारण
पिछले कुछ हफ्तों में गिग वर्कर्स यूनियन (डिलीवरी बॉय, राइडर और पार्ट-टाइम वर्कर्स) ने कई जगह प्रदर्शन और हड़ताल की थी।
उन्होंने कहा था कि 10–20 मिनट में डिलीवरी का सिस्टम बहुत खतरनाक है क्योंकि राइडर्स को तेज बाइक चलानी पड़ती है, ट्रैफिक नियम तोड़ने का दबाव बनता है और एक्सीडेंट का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। 31 दिसंबर 2025 (न्यू ईयर ईव) को भी डिलीवरी वर्कर्स ने स्ट्राइक की थी और श्रम मंत्री को ज्ञापन सौंपा था।
अब क्या बदलेगा?
अब कंपनियां अपने ऐप या विज्ञापनों में यह नहीं लिखेंगी कि “हर हाल में 10 मिनट में डिलीवरी मिलेगी।” मतलब यह नहीं कि डिलीवरी स्लो हो जाएगी, बल्कि मतलब यह है कि डिलीवरी बॉय पर अनावश्यक दबाव नहीं होगा। वे सुरक्षित तरीके से सामान पहुंचा सकेंगे। सड़क हादसे कम होंगे।
10 मिनट डिलीवरी की शुरुआत कैसे हुई?
कोरोना महामारी के दौरान लोगों को जरूरी सामान जल्दी चाहिए था। तब 30 मिनट में डिलीवरी भी बड़ी बात मानी जाती थी। धीरे-धीरे कंपनियों में मुकाबला बढ़ा और 15 मिनट, फिर 10 मिनट में दूध, सब्जी, दवा, किराना तक पहुंचाने का दावा शुरू हो गया। लेकिन इसी तेजी की दौड़ में डिलीवरी वर्कर्स की सुरक्षा पीछे छूट गई।
सरकार का साफ संदेश
अब सरकार ने साफ कर दिया है कि स्पीड से ज्यादा जरूरी है सेफ्टी। यह फैसला लाखों डिलीवरी बॉय के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है। अब वे बिना जान जोखिम में डाले अपना काम कर सकेंगे।