Edited By Anu Malhotra,Updated: 03 Jan, 2026 09:13 AM
केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। 8वें वेतन आयोग से पहले सरकार ने कुछ अहम नियमों में बदलाव किया है, जिसका सीधा फायदा करीब डेढ़ करोड़ कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलने वाला है। इन बदलावों का सबसे बड़ा असर...
नेशनल डेस्क: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। 8वें वेतन आयोग से पहले सरकार ने कुछ अहम नियमों में बदलाव किया है, जिसका सीधा फायदा करीब डेढ़ करोड़ कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलने वाला है। इन बदलावों का सबसे बड़ा असर सैलरी और पेंशन भुगतान पर पड़ेगा, जहां बढ़ी हुई रकम एरियर के साथ मिलने की संभावना है।
बता दें कि 31 दिसंबर 2025 को 7वें केंद्रीय वेतन आयोग का 10 साल का कार्यकाल औपचारिक रूप से पूरा हो चुका है। जनवरी 2016 से लागू इस आयोग ने करीब 1.2 करोड़ कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी, भत्तों और पेंशन की दिशा तय की थी। अब निगाहें पूरी तरह 8वें वेतन आयोग पर टिक गई हैं, जिसकी प्रक्रिया औपचारिक तौर पर आगे बढ़ चुकी मानी जा रही है।
परंपरा के मुताबिक हर 10 साल में नया वेतन आयोग लागू होता है। इसी क्रम में 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जा रही हैं। हालांकि, सिफारिशों को अंतिम रूप देकर लागू करने में आमतौर पर 18 से 24 महीने का वक्त लगता है। ऐसे में अगर देरी होती है, तो कर्मचारियों और पेंशनर्स को बढ़ी हुई सैलरी और पेंशन एरियर के साथ मिलने की संभावना रहती है।
7वें वेतन आयोग की बड़ी उपलब्धियां
7वें वेतन आयोग का सबसे बड़ा असर बेसिक सैलरी में ऐतिहासिक बढ़ोतरी के रूप में देखने को मिला। लेवल-1 के कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी 7,000 रुपये से बढ़कर 18,000 रुपये हो गई थी, जो अपने आप में एक बड़ा बदलाव था। शुरुआत में शून्य रहने वाला महंगाई भत्ता (DA) 10 वर्षों में बढ़कर 58% तक पहुंच गया, जिसे इस आयोग के तहत आखिरी DA माना जा रहा है।
फिटमेंट फैक्टर बना सैलरी बढ़ोतरी की कुंजी
7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। इसी फैक्टर के आधार पर पुराने वेतन को नए वेतन में बदला गया, जिससे खासतौर पर निचले और जूनियर स्तर के कर्मचारियों को बड़ा फायदा मिला। अब 8वें वेतन आयोग को लेकर अनुमान है कि फिटमेंट फैक्टर 2.15 या उससे अधिक हो सकता है। अगर ऐसा होता है, तो सभी लेवल के कर्मचारियों के मूल वेतन में अच्छी-खासी बढ़ोतरी तय मानी जा रही है।
भत्तों में बदलाव और पुनर्गठन
7वें वेतन आयोग में सिर्फ सैलरी ही नहीं, बल्कि HRA, ट्रांसपोर्ट अलाउंस और अन्य भत्तों की भी व्यापक समीक्षा की गई। कई भत्तों को आपस में जोड़ा गया, कुछ की सीमा तय हुई और कुछ में संशोधन किया गया। इसका असर यह हुआ कि शहर और पोस्टिंग के हिसाब से कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी में अंतर दिखा। महंगाई भत्ता 50% के पार जाने के बाद सरकार ने जनवरी 2024 से ग्रेच्युटी की टैक्स-फ्री सीमा 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दी थी। साथ ही कई भत्तों में 25% तक की बढ़ोतरी का लाभ भी कर्मचारियों को मिला।
नई यूनिफाइड पेंशन स्कीम
पेंशन व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव हुआ। 1 अप्रैल 2025 से यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) लागू की गई, जिसे NPS और पुरानी पेंशन स्कीम का मिश्रण माना जा रहा है। इस स्कीम के तहत गारंटीड और महंगाई से जुड़ी पेंशन का प्रावधान किया गया है। कम से कम 10 साल की सेवा पूरी करने पर 10,000 रुपये मासिक पेंशन की गारंटी भी इसमें शामिल है।
8वें वेतन आयोग से बढ़ीं उम्मीदें
अब जब 7वां वेतन आयोग अपने सफर के अंत में पहुंच चुका है, तो 8वें वेतन आयोग को लेकर उम्मीदें और चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि इस बार उच्च स्तर के अधिकारियों को ज्यादा लाभ मिल सकता है। अनुमानों के अनुसार, लेवल-1 कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये से बढ़कर करीब 38,700 रुपये तक पहुंच सकता है। वहीं लेवल-18 के अधिकारी, जिनमें कैबिनेट सचिव जैसे शीर्ष पद शामिल हैं, उन्हें सबसे ज्यादा वेतन वृद्धि मिलने की संभावना जताई जा रही है।