‘करवा चौथ' का विज्ञापन वापस लेने पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने जताई नाराजगी, बोले-लोगों को बदलनी चाहिए अपनी सोच

Edited By Updated: 02 Nov, 2021 03:30 PM

dabur had to be withdrawn on basis of public anger justice chandrachud

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने ‘‘जनता की असहिष्णुता'' की वजह से समलैंगिक जोड़े को प्रदर्शित करने वाले ‘करवा चौथ'' का विज्ञापन वापस लेने पर नराजगी जताई और कहा कि पुरुषों और महिलाओं को मानसिकता बदलने की जरूरत है।

नेशनल डेस्क: सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने ‘‘जनता की असहिष्णुता' की वजह से समलैंगिक जोड़े को प्रदर्शित करने वाले ‘करवा चौथ' का विज्ञापन वापस लेने पर नराजगी जताई और कहा कि पुरुषों और महिलाओं को मानसिकता बदलने की जरूरत है। जस्टिस चंद्रचूड़ भारतीय कंपनी डाबर के ‘करवा चौथ' पर जारी विज्ञापन का संदर्भ दे रहे थे। यह त्योहार उत्तर भारत में पत्नी अपने पति की सलामती और लंबी उम्र के लिए रखती हैं। डाबर के विज्ञापन में दो महिलाओं को जोड़े के रूप में दिखाया गया था जो त्योहार मना रही हैं। इस विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया पर मध्यप्रदेश के एक नेता द्वारा व्यक्त की गई नाराजगी के बाद इसे वापस ले लिया गया था।

 

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि केवल दो दिन पहले, सभी को पता चला कि इस विज्ञापन को कंपनी को वापस लेना पड़ा। यह समलैंगिक जोड़े के लिए करवा चौथ का विज्ञापन था। इसे जनता की असहिष्णुता के आधार पर वापस लिया गया। जस्टिस ने यह बात वाराणसी में राष्ट्रव्यापी विधि जागरूकता कार्यक्रम ‘विधि जागरूकता के जरिए महिलाओं का सशक्तिकरण' कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर को डिजिटल तरीके से संबोधित करते हुए कही। जागरूकता अभियान राष्ट्रीय विधि सेवा प्राधिकरण के जरिए चलाए जा रहा है और इसका नेतृत्व सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश यूयू ललित कर रहे हैं।

 

इस अभियान में राष्ट्रीय महिला आयोग और उत्तर प्रदेश राज्य विधि सेवा प्राधिकरण सहयोग कर रहा है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि महिलाओं के अधिकारों के प्रति जागरूकता का तभी अर्थ होगा जब यह युवा पीढ़ी के पुरुषों में पैदा की जाए। उन्होंने कहा कि जागरूकता केवल महिलाओं का मुद्दा नहीं है। मेरा मानना है कि महिलाओं को अधिकारों से वंचित करने की समस्या का हमें समाधान तलाशना है तो उसके पैदा होने के केंद्र की मानसिकता को बदलना होगा, पुरुष और महिलाओं दोनों की। महिलाओं की वास्तविक स्वतंत्रता, वास्तव में विरोधाभासी है।'' यह कार्यक्रम वाराणसी में आयोजित किया गया जिसमें सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस कृष्ण मुरारी, इलाहाबाद सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल भी मौजूद रहे।

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