चारधाम यात्रा में मौत... शव कैसे पहुंचता है परिवार तक, क्या हैं प्रशासन के नियम और मुआवजा प्रक्रिया?

Edited By Updated: 01 Jun, 2025 03:04 PM

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उत्तराखंड की पवित्र चारधाम यात्रा हर साल लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जैसे धार्मिक स्थलों पर भक्ति के लिए आने वाले लोग अपने जीवन के बड़े सपनों में से एक यह यात्रा मानते हैं। लेकिन भारी भीड़ और कठिन...

नेशनल डेस्क: उत्तराखंड की पवित्र चारधाम यात्रा हर साल लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जैसे धार्मिक स्थलों पर भक्ति के लिए आने वाले लोग अपने जीवन के बड़े सपनों में से एक यह यात्रा मानते हैं। लेकिन भारी भीड़ और कठिन रास्तों के कारण कई बार दुर्भाग्य भी घटित होता है। इस साल शुरू हुए एक महीने के भीतर ही 73 श्रद्धालुओं की यात्रा के दौरान मौत हो चुकी है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि यात्रा के दौरान किसी श्रद्धालु की मृत्यु हो जाए, तो उसके शव का क्या प्रबंध होता है? परिवार तक शव कैसे पहुंचता है? क्या प्रशासन मुआवजा भी देता है? आइए इन सभी सवालों का विस्तार से जवाब जानते हैं।

यात्रा के दौरान मौत पर सरकार का दायित्व
उत्तराखंड सरकार यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए कई सुरक्षा उपाय करती है। यात्रा शुरू होने से पहले सभी श्रद्धालुओं का रजिस्ट्रेशन कराया जाता है, जिससे उनकी पहचान और परिवार का विवरण प्रशासन के पास उपलब्ध रहता है। इसके साथ ही यात्रियों को दुर्घटना बीमा का विकल्प दिया जाता है, जिसमें शामिल होने पर एक लाख रुपये तक का बीमा कवर मिलता है। अगर किसी यात्री की यात्रा के दौरान मृत्यु होती है, तो बीमा के तहत परिवार को उक्त राशि का क्लेम दिया जाता है।

शव प्रबंधन और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया
यात्रा के दौरान हुई मौत की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन सक्रिय हो जाता है। सबसे पहले मृतक का पोस्टमार्टम कराया जाता है, जिससे मृत्यु का कारण निर्धारित किया जा सके। इसके बाद शव की पहचान की जाती है। यह कार्य कभी-कभी चुनौतीपूर्ण हो सकता है, खासकर तब जब व्यक्ति अकेले यात्रा पर हो और उसके साथ कोई परिचित न हो।

शव की पहचान और पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद, प्रशासन शव को परिवार तक पहुंचाने की व्यवस्था करता है। सामान्यत: जो श्रद्धालु पड़ोसी राज्यों से आते हैं, उनके शव सड़क मार्ग से पहुंचाए जाते हैं। लेकिन जो दूर-दराज के राज्य से आते हैं, उनके शव को हवाई मार्ग से भेजने का प्रबंध भी किया जाता है। कई बार परिवार के सदस्य खुद मौके पर पहुंचकर वहीं अंतिम संस्कार करना पसंद करते हैं, तब भी प्रशासन सहायता करता है।

मुआवजे की व्यवस्था और नियम
उत्तराखंड सरकार ने चारधाम यात्रा के लिए विशेष मुआवजा नीति बनाई है। यदि यात्रा के दौरान श्रद्धालु की मृत्यु होती है तो परिवार को सरकार की ओर से मुआवजा राशि दी जाती है। इसके लिए मृतक की मृत्यु की सूचना तुरंत प्रशासन को देनी होती है और निर्धारित नियमों का पालन किया जाना आवश्यक होता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मुआवजे की राशि का निर्धारण होता है।

पहचान की समस्या और सहायता
यात्रा के दौरान अकेले आए श्रद्धालुओं की पहचान स्थानीय प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती होती है। ऐसे मामलों में परिवार तक संपर्क साधना मुश्किल हो जाता है। मृतकों के परिजन बीमा कवर में शामिल होने पर संबंधित कंपनी से स्वयं क्लेम प्रक्रिया पूरी करते हैं। इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कुछ एनजीओ भी कार्यरत हैं, जो परिजनों को आवश्यक दस्तावेज जुटाने और फॉर्म भरने में मदद करते हैं।

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