लाल किला हमला मामले में दिल्ली कारा विभाग ने ‘डेथ वारंट' जारी करने के लिये अदालत को लिखा पत्र

Edited By Updated: 20 Feb, 2023 05:22 PM

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दिल्ली के कारा विभाग ने राजधानी की एक अदालत को वर्ष 2000 में लाल किला पर हुए हमले के दोषी को सुनाई गई मौत की सजा पर तामील के वास्ते वारंट (डेथ वारंट) जारी करने के लिये पत्र लिखा है। अधिकारियों ने सोमवार को इसकी जानकारी दी। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल...

 

नई दिल्ली: दिल्ली के कारा विभाग ने राजधानी की एक अदालत को वर्ष 2000 में लाल किला पर हुए हमले के दोषी को सुनाई गई मौत की सजा पर तामील के वास्ते वारंट (डेथ वारंट) जारी करने के लिये पत्र लिखा है। अधिकारियों ने सोमवार को इसकी जानकारी दी।

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल नवंबर में मौत की सजा का सामना कर रहे लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी मोहम्मद आरिफ उर्फ अश्फाक की उस याचिका को खारिज दिया था, जिसमें दोषी ने मौत की सजा की समीक्षा का अनुरोध किया था। कारा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उन्होंने इस महीने की शुरुआत में एक अदालत को पत्र लिखा और आगे की प्रक्रिया शुरू की। आरिफ ने राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर नहीं की है। अधिकारी ने बताया कि मामला 27 फरवरी को सुनवाई के लिये सूचीबद्ध है।

गौरतलब है कि 22 दिसंबर 2000 को कुछ घुसपैठिये मुगल काल में बने लाल किले में घुस गये और वहां तैनात भारतीय सेना के राजपुताना राइफल्स की यूनिट सात के जवानों पर गोलीबारी शुरू कर दी, जिसमें सेना के तीन जवानों की मौत हो गयी। ये आतंकी बाद में लाल किला के पिछली तरफ की दीवार फांद कर मौके से भाग गये थे। आरिफ को अक्टूबर 2005 में निचली अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी, जिसकी सितंबर 2007 में दिल्ली हाई कोर्ट ने पुष्टि की। इसके बाद उसने हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुये उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। शीर्ष अदालत ने भी अगस्त 2011 में आरिफ की मौत की सजा को बरकरार रखा था।  

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