दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: दूसरी शादी के बाद भी बहू ही रहेगी पेंशन की हकदार, जानिए क्या है पूरा मामला?

Edited By Updated: 30 Jan, 2026 06:04 PM

delhi hc rules remarriage doesn t end widow s right to family pension

दिल्ली हाईकोर्ट ने CRPF के एक शहीद जवान की पारिवारिक पेंशन से जुड़े मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। जस्टिस अनिल क्षत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने साफ किया है कि पारिवारिक पेंशन कोई 'पुश्तैनी विरासत' नहीं है, बल्कि यह एक 'सामाजिक सुरक्षा'...

नेशनल डेस्क: दिल्ली हाईकोर्ट ने CRPF के एक शहीद जवान की पारिवारिक पेंशन से जुड़े मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। जस्टिस अनिल क्षत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने साफ किया है कि पारिवारिक पेंशन कोई 'पुश्तैनी विरासत' नहीं है, बल्कि यह एक 'सामाजिक सुरक्षा' है। कोर्ट ने कहा कि यदि जवान की विधवा जीवित है, तो वही पेंशन की प्राथमिक हकदार होगी, भले ही उसने दोबारा विवाह कर लिया हो।

PunjabKesari

ये था पूरा मामला

यह मामला 2014 में जम्मू-कश्मीर की बाढ़ में राहत कार्य के दौरान शहीद हुए एक CRPF जवान से जुड़ा है। जवान की मौत के बाद नियमानुसार उनकी पत्नी को पेंशन मिल रही थी। बाद में महिला ने दूसरी शादी कर ली। इस पर शहीद जवान के माता-पिता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनका तर्क था कि पुनर्विवाह के बाद बहू के मृतक पति के परिवार से कानूनी रिश्ता खत्म हो गया है, इसलिए आर्थिक तंगी झेल रहे बुजुर्ग माता-पिता को यह पेंशन मिलनी चाहिए।

हाईकोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां

कोर्ट ने कहा कि 'केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम' के तहत पेंशन पाने वालों की एक तय वरीयता सूची है। इसमें पहला स्थान विधवा या विधुर का है। माता-पिता का नंबर तभी आता है जब मृत कर्मचारी की न तो पत्नी हो और न ही कोई बच्चा। अदालत ने माना कि सरकार का यह नियम विधवाओं को दोबारा घर बसाने के लिए प्रोत्साहित करने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए है। जस्टिस की बेंच ने स्पष्ट किया कि पेंशन देना सरकार की एक कल्याणकारी नीति है ताकि जवान के बलिदान के बाद उनके आश्रितों को वित्तीय संकट न झेलना पड़े।

PunjabKesari

माता-पिता का दावा नामंजूर

अदालत ने माता-पिता की दलील को 'असंवैधानिक' बताते हुए याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि नियमों के मुताबिक, जब तक पात्र विधवा मौजूद है, तब तक पेंशन माता-पिता को नहीं की जा सकती। यह फैसला उन हजारों विधवाओं के लिए राहत भरा है जो पुनर्विवाह के बाद सामाजिक और आर्थिक असुरक्षा के डर में रहती हैं।

 

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!