Edited By Mansa Devi,Updated: 02 Jan, 2026 11:05 AM

मुंबई, दिल्ली या देश के किसी भी बड़े शहर की पहचान ऊंची इमारतों के साथ झुग्गी-बस्तियों से भी जुड़ी रही है। लेकिन अब इस तस्वीर को बदलने की दिशा में गुजरात का सूरत शहर एक बड़ा उदाहरण बनने जा रहा है।
नेशनल डेस्क: मुंबई, दिल्ली या देश के किसी भी बड़े शहर की पहचान ऊंची इमारतों के साथ झुग्गी-बस्तियों से भी जुड़ी रही है। लेकिन अब इस तस्वीर को बदलने की दिशा में गुजरात का सूरत शहर एक बड़ा उदाहरण बनने जा रहा है। देश की ‘डायमंड सिटी’ कहलाने वाला सूरत जल्द ही भारत का पहला स्लम-मुक्त शहर बनने की दहलीज पर खड़ा है।
PMAY और राज्य योजनाओं से मिली रफ्तार
स्वच्छता और तेज आर्थिक विकास के लिए पहचाने जाने वाले सूरत ने अब आवास के क्षेत्र में भी बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सूरत नगर निगम ने प्रधानमंत्री आवास योजना और राज्य सरकार की हाउसिंग पॉलिसी को प्रभावी तरीके से जमीन पर उतारा। इसका नतीजा यह हुआ कि शहर की ज्यादातर झुग्गी-बस्तियों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर वहां पक्के मकानों का निर्माण किया गया। प्रशासन का साफ लक्ष्य है कि सूरत में कोई भी परिवार झुग्गी या कच्चे घर में रहने को मजबूर न रहे।
प्रवासी आबादी के बीच बड़ी चुनौती
एक बड़े औद्योगिक केंद्र होने के कारण सूरत में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए प्रवासी मजदूरों की संख्या काफी ज्यादा है। इतनी बड़ी आबादी को सुरक्षित और स्थायी आवास उपलब्ध कराना नगर निगम के लिए आसान नहीं था। इसके बावजूद, बीते कुछ वर्षों में लाखों लोगों को नए और पक्के घरों में शिफ्ट किया जा चुका है, जो अपने-आप में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
देश के लिए बनेगा रोल मॉडल
अहमदाबाद मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक, सूरत की यह पहल सिर्फ गुजरात तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि देश के अन्य महानगरों के लिए भी एक मजबूत रोल मॉडल बन सकती है। अगर सूरत पूरी तरह स्लम-मुक्त शहर बनने में सफल होता है, तो यह शहरी विकास के क्षेत्र में भारत की छवि को वैश्विक मंच पर और मजबूत करेगा।
शहर से आगे बढ़कर सोच
सूरत का यह प्रयास दिखाता है कि सही नीति, मजबूत प्रशासन और निरंतर निगरानी से झुग्गी-मुक्त शहर का सपना हकीकत में बदला जा सकता है। आने वाले समय में सूरत न सिर्फ डायमंड सिटी, बल्कि आधुनिक और समावेशी शहरी विकास का प्रतीक भी बन सकता है।