Edited By Pardeep,Updated: 27 Oct, 2025 10:49 PM

उत्तराखंड के पर्वतीय जिले चमोली में सोमवार को दिनभर में दो बार भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिससे इलाके में लोगों में हल्की दहशत फैल गई। पहली बार झटके सुबह 6:57 बजे और दूसरी बार शाम करीब 7:47 बजे आए। दोनों भूकंपों की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 3.4 मापी...
नेशनल डेस्कः उत्तराखंड के पर्वतीय जिले चमोली में सोमवार को दिनभर में दो बार भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिससे इलाके में लोगों में हल्की दहशत फैल गई। पहली बार झटके सुबह 6:57 बजे और दूसरी बार शाम करीब 7:47 बजे आए। दोनों भूकंपों की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 3.4 मापी गई।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, भूकंप का केंद्र चमोली क्षेत्र में ही था, जिसकी गहराई करीब 5 किलोमीटर आंकी गई है। पहाड़ी इलाका होने के कारण यहां झटके कुछ सेकेंड तक महसूस किए गए, हालांकि किसी प्रकार की क्षति या जनहानि की कोई सूचना नहीं मिली है।
लोग घबराकर घरों से बाहर निकले
पहले झटके के समय सुबह के शुरुआती घंटे थे। कई लोग उस वक्त अपने घरों में या खेतों की ओर जा रहे थे। अचानक जमीन हिलने पर लोग घबरा गए और घर व दुकानों से बाहर निकलकर खुले स्थानों में आ गए। इसी तरह शाम को आए झटकों ने भी लोगों को डरा दिया। कई लोगों ने बताया कि फर्नीचर और दरवाजे हिलने लगे, जिसके बाद वे एहतियातन बाहर निकल आए।
प्रशासन ने की सतर्कता की अपील
जिलाधिकारी चमोली ने बताया कि जिला प्रशासन ने तुरंत सभी थानाध्यक्षों, तहसीलदारों और आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट कर दिया है। फिलहाल कहीं भी नुकसान या हताहत की रिपोर्ट नहीं है। जिलाधिकारी ने कहा, “लोगों से अपील है कि अफवाहों पर ध्यान न दें। प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं। किसी भी तरह की आपात स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें।”
उत्तराखंड में भूकंप का बढ़ता खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तराखंड सिस्मिक जोन-4 और जोन-5 में आता है, जो देश के सबसे संवेदनशील भूकंप क्षेत्रों में गिने जाते हैं। हाल के वर्षों में गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्र में बार-बार हल्के झटके महसूस किए जा रहे हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि क्षेत्र में टेक्टॉनिक गतिविधियां सक्रिय हैं।
भू-वैज्ञानिकों का कहना है कि इन छोटे भूकंपों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। “ये झटके कभी-कभी बड़े भूकंप की संभावना का संकेत हो सकते हैं। लोगों को हमेशा सतर्क रहना चाहिए और भूकंप के दौरान सुरक्षा उपायों को जानना जरूरी है,” ऐसा कहना है वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक का।