ED की बड़ी कार्रवाई: अंसल हब-83 घोटाले में 82 करोड़ की संपत्ति अटैच, लाइसेंस खत्म होने के बाद भी वसूला पैसा

Edited By Updated: 19 Feb, 2026 06:36 PM

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गुरुग्राम के सेक्टर-83 स्थित चर्चित कमर्शियल प्रोजेक्ट Ansal HUB-83 से जुड़े कथित रियल एस्टेट घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई की है।

नेशनल डेस्क: गुरुग्राम के सेक्टर-83 स्थित चर्चित कमर्शियल प्रोजेक्ट Ansal HUB-83 से जुड़े कथित रियल एस्टेट घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई की है। Enforcement Directorate (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत करीब 82 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के प्रावधानों के तहत की गई है, ताकि जांच पूरी होने तक संपत्ति की खरीद-फरोख्त या ट्रांसफर पर रोक लगाई जा सके।

 क्या है पूरा मामला?

जांच के दायरे में आया प्रोजेक्ट लगभग 2.47 एकड़ (करीब 19 कनाल 15 मरला) में फैला हुआ है। इसमें 147 दुकानें, 137 ऑफिस यूनिट्स और दो रेस्टोरेंट स्पेस शामिल बताए गए हैं। ED की गुरुग्राम जोनल यूनिट ने जमीन के साथ-साथ अब तक किए गए निर्माण को भी अटैच किया है, जिससे निवेशकों के हितों की रक्षा और साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जा सके।

FIR से शुरू हुई जांच

यह मामला जून 2023 में हरियाणा पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी पर आधारित है। शिकायत में Ansal Housing Limited (पूर्व में Ansal Housing & Construction Ltd.) के प्रमोटर्स और वरिष्ठ अधिकारियों पर साजिश और धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए हैं। मुख्य आरोपियों में कंपनी के होलटाइम डायरेक्टर कुशाग्र अंसल के अलावा जुड़ी कंपनियां—Samyak Projects Private Limited और Akanksha Infrastructure Private Limited—भी शामिल हैं। शिकायत HUB-83 आवंटी कल्याण संघ की ओर से की गई थी, जो 1000 से अधिक निवेशकों का प्रतिनिधित्व करता है।

जांच में सामने आई अनियमितताएं

  • ED की पड़ताल में कई गंभीर गड़बड़ियां उजागर हुईं:
  • जरूरी सरकारी मंजूरियों से पहले ही यूनिट्स की बिक्री।
  • दिसंबर 2015 में लाइसेंस की अवधि समाप्त होने के बावजूद नवीनीकरण न कराना।
  • सितंबर 2023 तक निवेशकों से धन संग्रह जारी रखना।
  • प्रोजेक्ट पूरा करने और कब्जा देने के वादे के बावजूद 15 वर्षों में काम अधूरा।
  • अब तक ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी नहीं।
  • निवेशकों से जुटाई गई राशि का कथित रूप से अन्य कार्यों और निजी उपयोग में इस्तेमाल।
  • बताया जा रहा है कि 2011 से 2023 के बीच निवेशकों से 82 करोड़ रुपये से अधिक की रकम ली गई।

 नियामक संस्थाओं में भी शिकायत

कई निवेशकों ने Haryana Real Estate Regulatory Authority (HRERA) के समक्ष भी शिकायत दर्ज कराई थी। उनका आरोप है कि लंबे इंतजार के बावजूद उन्हें न तो कब्जा मिला और न ही परियोजना पूरी हुई। यह कार्रवाई निवेशकों के हितों की सुरक्षा और कथित वित्तीय अनियमितताओं पर रोक लगाने की दिशा में अहम मानी जा रही है। ED ने संकेत दिए हैं कि जांच जारी है और आगे भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
 

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