Edited By Rohini Oberoi,Updated: 24 Jan, 2026 01:07 PM

भारत के महानतम वैज्ञानिक और परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के भीष्म पितामह डॉ. होमी जहांगीर भाभा की आज पुण्यतिथि है। 24 जनवरी 1966 को एक विमान हादसे में उनकी रहस्यमयी मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। यह एक ऐसी क्षति थी जिसने भारत के परमाणु सपनों की...
Homi Jehangir Bhabha Plane Crash: भारत के महानतम वैज्ञानिक और परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के भीष्म पितामह डॉ. होमी जहांगीर भाभा की आज पुण्यतिथि है। 24 जनवरी 1966 को एक विमान हादसे में उनकी रहस्यमयी मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। यह एक ऐसी क्षति थी जिसने भारत के परमाणु सपनों की गति को कई साल पीछे धकेल दिया। आइए जानते हैं उस विमान हादसे की परतें और डॉ. भाभा के अधूरे सपनों की दास्तां।
वह काली सुबह: जब आसमान में थम गई कंचनजंघा
जनवरी 1966 की कड़कड़ाती ठंड में एयर इंडिया की फ्लाइट 101 जिसे 'कंचनजंघा' नाम दिया गया था मुंबई से लंदन के लिए उड़ी थी। विमान में डॉ. भाभा समेत 117 लोग सवार थे। जेनेवा में उतरने से ठीक पहले यह विमान फ्रांस के बर्फीले पहाड़ों (फ्रेंच आल्प्स) की मॉउंट ब्लांक चोटी से टकरा गया। यह टक्कर 4,677 मीटर की ऊंचाई पर हुई। विमान में सवार सभी 117 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की ताशकंद में मौत के महज दो हफ्ते बाद यह दूसरी बड़ी राष्ट्रीय त्रासदी थी।

होमी भाभा: भारत के एटमी सपनों के रचयिता
30 अक्टूबर 1909 को जन्मे भाभा केवल एक वैज्ञानिक नहीं बल्कि एक दूरदर्शी निर्माता थे। उन्होंने TIFR (टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च) और BARC (भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर) जैसी संस्थाओं की नींव रखी। 1965 में डॉ. भाभा ने कहा था कि यदि सरकार अनुमति दे तो भारत मात्र 18 महीने में परमाणु बम तैयार कर सकता है। उनके इस आत्मविश्वास ने दुनिया के शक्तिशाली देशों की नींद उड़ा दी थी।
हादसा या सोची-समझी साजिश?
विमान दुर्घटना की आधिकारिक रिपोर्ट में इसे पायलट की गलती और तकनीकी खामी बताया गया लेकिन इसके पीछे की थ्योरी आज भी दुनिया को चौंकाती है:

1. CIA पर शक की सुई
2008 में आई एक किताब 'Conversations with the Crow' ने तहलका मचा दिया। इसमें पूर्व CIA अधिकारी रॉबर्ट क्राउली के हवाले से दावा किया गया कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA ने भारत के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए विमान के कार्गो सेक्शन में बम विस्फोट कराया था।
2. मलबे के रहस्य
विमान का मलबा मुख्य जगह से काफी दूर पाया गया। 2017 में एक स्विस पर्वतारोही को कुछ अवशेष मिले, जिससे यह संकेत मिला कि शायद विमान की हवा में किसी अन्य चीज से टक्कर हुई थी, क्योंकि ईंधन से भरे होने के बावजूद उसमें आग नहीं लगी थी।

आज भी अमर है उनकी विरासत
डॉ. भाभा के जाने के बाद भी उनके लगाए गए वैज्ञानिक पौधों ने विशाल वृक्ष का रूप लिया। 1974 में भारत ने पोखरण में अपना पहला परमाणु परीक्षण कर दुनिया को अपनी ताकत दिखाई, जिसका आधार डॉ. भाभा ने ही तैयार किया था।