Edited By Mansa Devi,Updated: 02 Jan, 2026 01:38 PM

नए साल के पहले दिन असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ी खुशखबरी दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 8वें वेतन आयोग के गठन के बाद अब तक किसी भी राज्य ने अपना वेतन आयोग नहीं...
नेशनल डेस्क: नए साल के पहले दिन असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ी खुशखबरी दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 8वें वेतन आयोग के गठन के बाद अब तक किसी भी राज्य ने अपना वेतन आयोग नहीं बनाया है, लेकिन असम इस दिशा में पहला कदम उठाकर इतिहास रचने जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में कर्मचारियों के सैलरी स्ट्रक्चर में संशोधन के लिए 8वें राज्य वेतन आयोग की स्थापना की जाएगी।
गुवाहाटी में हुआ ऐलान, सुभाष दास करेंगे आयोग की अगुवाई
गुवाहाटी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि 8वें राज्य वेतन आयोग का गठन पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव सुभाष दास की अध्यक्षता में किया जाएगा। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब 7वें वेतन आयोग के प्रावधान 1 जनवरी 2026 को समाप्त होने वाले हैं। मुख्यमंत्री ने इसे कर्मचारियों के कल्याण की दिशा में एक अहम और दूरगामी कदम बताया।
वेतन बढ़ोतरी को लेकर बढ़ी उम्मीदें
8वें वेतन आयोग के लागू होने के बाद राज्य कर्मचारियों के वेतन में बड़ा इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है। अनुमान है कि निचले स्तर से लेकर उच्च पदों तक सभी कर्मचारियों के सैलरी स्ट्रक्चर में उल्लेखनीय सुधार होगा, जिससे उनकी आय और जीवन स्तर में सुधार देखने को मिल सकता हैं। लेवल-1 के कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये से बढ़कर 38,700 रुपये हो सकता हैं। लेवल-5 में यह 29,200 से 62,780 रुपये, लेवल-10 में 56,100 से 1,20,615 रुपये और लेवल-15 में 1,82,200 से बढ़कर 3,91,730 रुपये तक पहुंच सकता हैं। वहीं लेवल-18 के अधिकारियों का वेतन 2.50 लाख से बढ़कर करीब 5.37 लाख रुपये होने का अनुमान हैं।
सीनियर अधिकारियों और पेंशनभोगियों को भी होगा लाभ
बताया जा रहा है कि इस वेतन आयोग का सबसे अधिक लाभ उच्च स्तर के अधिकारियों को मिल सकता है, हालांकि पेंशनभोगियों की आय में भी इसका सकारात्मक असर पड़ेगा। जनवरी 2025 में केंद्र सरकार द्वारा 8वें वेतन आयोग के गठन की घोषणा के बाद असम का यह फैसला अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।