Edited By Parveen Kumar,Updated: 28 Feb, 2026 05:35 PM

देश में लगातार बढ़ती महंगाई ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की आर्थिक स्थिति पर सीधा असर डाला है। घर का मासिक बजट पहले की तुलना में ज्यादा दबाव में है। खाने-पीने की चीजों से लेकर बच्चों की शिक्षा, किराया और स्वास्थ्य खर्च तक हर...
नेशनल डेस्क : देश में लगातार बढ़ती महंगाई ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की आर्थिक स्थिति पर सीधा असर डाला है। घर का मासिक बजट पहले की तुलना में ज्यादा दबाव में है। खाने-पीने की चीजों से लेकर बच्चों की शिक्षा, किराया और स्वास्थ्य खर्च तक हर क्षेत्र में बढ़ोतरी ने आम वेतनभोगी परिवारों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। ऐसे माहौल में 8वें वेतन आयोग को लेकर उम्मीदें और तेज हो गई हैं।
इसी बीच फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशंस (FNPO) ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है। संगठन ने आयोग की अध्यक्ष जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को पत्र लिखकर मांग की है कि वर्तमान में मिल रहे 50 प्रतिशत महंगाई भत्ते (DA) को मूल वेतन में शामिल किया जाए। उनका कहना है कि यह कदम कर्मचारियों और पेंशनर्स को तत्काल वित्तीय राहत दे सकता है।
50% DA को बेसिक में शामिल करने की जरूरत क्यों?
महंगाई भत्ता कर्मचारियों की आय को बढ़ती कीमतों के अनुरूप बनाए रखने के लिए दिया जाता है। लेकिन हाल के वर्षों में DA लगातार बढ़ते हुए 50 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि जब महंगाई भत्ता इतनी ऊंची दर पर पहुंच जाए, तो यह संकेत है कि मौजूदा मूल वेतन जीवन-यापन की वास्तविक लागत को पूरा करने में सक्षम नहीं रह गया है। FNPO का कहना है कि पूर्व में भी ऐसी स्थिति आने पर DA को मूल वेतन में समाहित किया गया था। इससे वेतन संरचना को नया आधार मिला और आगे की वेतन वृद्धि अधिक संतुलित ढंग से की जा सकी। संगठन का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियां भी वैसी ही हैं और अब इसी मॉडल को फिर से अपनाने का समय है।
1 जनवरी 2026 से लागू करने का प्रस्ताव
संगठन ने सुझाव दिया है कि 1 जनवरी 2026 से 50 प्रतिशत DA को बेसिक पे और पेंशन में मर्ज कर दिया जाए। उनका मानना है कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू होने में अभी समय लग सकता है, इसलिए यह कदम अंतरिम राहत के तौर पर प्रभावी साबित हो सकता है।
क्या होगा असर?
यदि 50 प्रतिशत DA मूल वेतन में जोड़ दिया जाता है, तो इसका प्रभाव केवल मासिक सैलरी तक सीमित नहीं रहेगा। चूंकि हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रांसपोर्ट अलाउंस जैसे भत्ते मूल वेतन के आधार पर तय होते हैं, इसलिए उनमें भी बढ़ोतरी संभावित है। पेंशनभोगियों के लिए यह फैसला और अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ मूल वेतन से जुड़े होते हैं। ऐसे में DA का मर्ज होना भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को भी मजबूत कर सकता है।
कर्मचारियों की नजर सरकार के फैसले पर
मध्यम वर्गीय कर्मचारियों का कहना है कि वेतन वृद्धि महंगाई की गति के अनुरूप नहीं हो पा रही है। रोजमर्रा की जरूरतों का खर्च तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन आय में उसी अनुपात में इजाफा नहीं हो रहा। ऐसे में 8वां वेतन आयोग लाखों परिवारों के लिए बड़ी उम्मीद का केंद्र बन गया है।