Edited By Sanjeev,Updated: 17 Oct, 2026 11:38 AM
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शनिवार को तमिलनाडु, पुडुचेरी और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक के कुछ इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। इसके साथ ही, अगले 6-7 दिनों तक कई दक्षिणी राज्यों में व्यापक बारिश और आंधी-तूफान जारी रहने के आसार है। IMD ने...
नई दिल्ली : भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शनिवार को तमिलनाडु, पुडुचेरी और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक के कुछ इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। इसके साथ ही, अगले 6-7 दिनों तक कई दक्षिणी राज्यों में व्यापक बारिश और आंधी-तूफान जारी रहने के आसार है। IMD ने शनिवार सुबह जारी अपने मौसम बुलेटिन में 17 से 20 अक्टूबर के बीच तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में तथा 17 अक्टूबर को दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में कहीं-कहीं भारी बारिश होने का अनुमान जताया है।
मौसम पूर्वानुमान के अनुसार 17 से 23 अक्टूबर तक केरल और माहे में, 17 से 19 अक्टूबर तक तटीय कर्नाटक में, 18 से 23 अक्टूबर तक दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में और 20 से 23 अक्टूबर तक लक्षद्वीप में भारी बारिश होने का अनुमान है। तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा में 17 और 18 अक्टूबर को भारी बारिश हो सकती है, जबकि 21 से 23 अक्टूबर के दौरान तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में कुछ जगहों पर भारी बारिश का अनुमान है।
IMD के अनुसार 17 से 22 अक्टूबर के बीच तटीय कर्नाटक, केरल, माहे, लक्षद्वीप, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में काफी व्यापक से लेकर व्यापक बारिश होने की संभावना है। तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 17 से 22 अक्टूबर के दौरान आंधी-तूफान के साथ बिजली गिरने और 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है, जो कभी-कभी 60 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं। तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा में 17 और 18 अक्टूबर को भी इसी तरह के हालात रहने की उम्मीद है। इन दिनों केरल, कर्नाटक और तेलंगाना में भी आंधी-तूफान आ सकता है, जिसमें 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जो कभी-कभी 50 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं।
मौसम विभाग के अनुसार, मौजूदा मौसमी परिस्थितियों के पीछे ऊपरी वायुमंडल में बने कई तंत्र हैं। इनमें उत्तरी तमिलनाडु और उससे सटे दक्षिणी तटीय आंध्र प्रदेश के ऊपर बना एक चक्रवाती परिसंचरण शामिल है, जो समुद्र तल से 5.8 किमी की ऊंचाई तक फैला हुआ है। इसके अलावा उत्तरी लक्षद्वीप के ऊपर भी एक चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है और उत्तरी केरल, दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक और उत्तरी तमिलनाडु से होते हुए पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी की ओर एक कम दबाव का क्षेत्र ( ट्रफ ) भी फैला हुआ है।
विभाग के अनुसार केरल के कन्नूर में 16 अक्टूबर की सुबह 8:30 बजे से 17 अक्टूबर की सुबह 5:30 बजे के बीच 15 सेमी बारिश दर्ज की गई। पुडुचेरी में 10 सेमी बारिश हुई, जबकि चेन्नई की नुंगमबक्कम वेधशाला और मंगलुरु के बाजपे हवाई अड्डे पर 7-7 सेमी बारिश दर्ज की गई। केरल और माहे में कुछ जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश हुई। वहीं, तटीय कर्नाटक के ज्यादातर हिस्सों में भारी बारिश हुई, जबकि तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल के कुछ इलाकों में भी भारी बारिश दर्ज की गई।
IMD ने उत्तर-पश्चिम भारत में 17-18 अक्टूबर और 21-22 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में कहीं-कहीं बारिश होने का अनुमान जताया है, जबकि उत्तराखंड में 17 और 18 अक्टूबर को कुछ जगहों पर बारिश हो सकती है। 17 अक्टूबर को पूर्वी राजस्थान में भी कहीं-कहीं बारिश होने के आसार है। हालांकि, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश में 17 से 23 अक्टूबर तक मौसम शुष्क रहने का अनुमान है।
IMD के अनुसार, उत्तरी पंजाब और आसपास के इलाकों में समुद्र तल से 3.1 किमी से 4.5 किमी की ऊंचाई पर एक पश्चिमी विक्षोभ, एक चक्रवाती परिसंचरण के रूप में मौजूद है। उत्तरी हरियाणा और आसपास के इलाकों में भी समुद्र तल से 3.1 किमी की ऊंचाई तक एक चक्रवामी परिसंचरण बना हुआ है। इन प्रणालियों के बावजूद सात दिनों के बारिश के पूर्वानुमान के अनुसार पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में मौसम शुष्क रहेगा। IMD ने बताया कि गुजरात के राजकोट में अधिकतम तापमान 40.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो बुलेटिन में शामिल आंकड़ों के अनुसार देश में सबसे अधिक है।
हिमाचल प्रदेश के मंडी में न्यूनतम तापमान 13.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो भारत के मैदानी इलाकों में सबसे कम न्यूनतम तापमान है। कोंकण और गोवा में 17 अक्टूबर को मौसम गर्म और उमस भरा रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि भारी बारिश और आंधी-तूफान के कारण कुछ जगहों पर जलभराव हो सकता है, निचले इलाकों में बाढ़ आ सकती है, खड़ी फसलों और कमजोर ढांचों को नुकसान पहुंच सकता है, तथा सड़क और रेल यातायात बाधित हो सकता है। प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को सलाह दी गई है कि वे बिजली कड़कने के दौरान पेड़ों के नीचे शरण लेने से बचें, ढीली वस्तुओं को सुरक्षित रखें और मौसम के बिगड़ने की स्थिति को देखते हुए सतकर् रहें। तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपने खेतों में पानी की निकासी का उचित प्रबंध करें और कटी हुई फसल को भारी बारिश से बचाएं।