RBI New Rules: बैंकिंग सेक्टर में बड़ा बदलाव, RBI के ये नए नियम 1 जुलाई 2026 से होगा लागू

Edited By Updated: 13 Feb, 2026 12:05 PM

reserve bank of india mis selling rbi banks refund complaint insurance polic

RBI ने बैंकिंग सेक्टर में ट्रांसप्रेंसी लाने और ग्राहकों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक द्वारा बुधवार को जारी किया गया "RBI  (कॉमर्शियल बैंक्स–रिस्पॉन्सिबल बिजनेस कंडक्ट) अमेंडमेंट डायरेक्शन 2026" का मसौदा सीधे तौर...

नेशनल डेस्क: RBI ने बैंकिंग सेक्टर में ट्रांसप्रेंसी लाने और ग्राहकों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक द्वारा बुधवार को जारी किया गया "RBI  (कॉमर्शियल बैंक्स–रिस्पॉन्सिबल बिजनेस कंडक्ट) अमेंडमेंट डायरेक्शन 2026" का मसौदा सीधे तौर पर उन वित्तीय संस्थानों पर नकेल कसेगा जो मुनाफे के चक्कर में ग्राहकों को गलत उत्पाद थमा देते हैं। यह नया नियम 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होने वाला है और इसका सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यदि mis-selling यानी गलत बिक्री का मामला साबित हो जाता है, तो बैंक न केवल ग्राहक को पूरी राशि लौटाने के लिए बाध्य होगा, बल्कि उसे हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई भी करनी होगी।

ग्राहकों की मर्जी और समय का सम्मान अनिवार्य
इस मसौदे के लागू होने के बाद बैंकों के लिए विज्ञापनों और मार्केटिंग की प्रक्रिया पूरी तरह बदल जाएगी। अब बैंक या उनके प्रतिनिधि किसी भी व्यक्ति को बिना उनकी स्पष्ट सहमति के कॉल या मैसेज नहीं कर सकेंगे। इसके अलावा, मार्केटिंग के लिए संपर्क करने का समय भी केवल कार्यालय घंटों तक ही सीमित कर दिया गया है, ताकि ग्राहकों की निजता भंग न हो। आरबीआई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बिक्री की प्रक्रिया डराने या बहकाने वाली न होकर पूरी तरह पारदर्शी और सूचनात्मक हो।

कर्मचारियों के इंसेंटिव स्ट्रक्चर पर बड़ा प्रहार
अक्सर देखा जाता है कि बैंक कर्मचारी अपने टारगेट पूरे करने के चक्कर में ग्राहकों को ऐसे उत्पाद बेच देते हैं जिनकी उन्हें जरूरत नहीं होती। आरबीआई ने इस जड़ पर प्रहार करते हुए स्पष्ट किया है कि बैंकों की आंतरिक नीतियां ऐसी नहीं होनी चाहिए जो कर्मचारियों या डायरेक्ट सेलिंग एजेंट्स को गलत बिक्री के लिए उकसाएं। विशेष रूप से थर्ड-पार्टी उत्पादों (जैसे बीमा या निवेश) के मामले में यह नियम और सख्त है। अब इन उत्पादों को बेचने वाले बैंक कर्मियों को संबंधित तीसरी पार्टी से सीधे या परोक्ष रूप से कोई कमीशन या प्रोत्साहन नहीं मिलेगा। साथ ही, 'टाई-इन सेल' यानी एक उत्पाद के साथ दूसरे उत्पाद को जबरन खरीदने की मजबूरी को भी पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।

डिजिटल धोखाधड़ी और 'डार्क पैटर्न' पर रोक
डिजिटल युग में ग्राहकों को गुमराह करने के लिए ऐप्स और वेबसाइट्स पर इस्तेमाल होने वाले 'डार्क पैटर्न' को लेकर भी आरबीआई ने कड़ा रुख अपनाया है। डार्क पैटर्न ऐसी डिजाइन तकनीकें होती हैं जो यूजर को भ्रमित कर उनसे अनजाने में किसी सेवा के लिए सहमति ले लेती हैं। आरबीआई ने अपने मसौदे में ऐसे लगभग एक दर्जन भ्रामक डिजाइनों की पहचान की है जिन्हें अब प्रतिबंधित किया जाएगा। यह कदम डिजिटल बैंकिंग को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

शिकायतों के बढ़ते अंबार और आगामी प्रक्रिया
हाल के वर्षों में बीमा और निवेश योजनाओं की गलत बिक्री को लेकर शिकायतों में भारी बढ़ोतरी देखी गई है, जिसके चलते आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इस पर लगाम लगाने का वादा किया था। इसी वादे को पूरा करते हुए यह विस्तृत मसौदा तैयार किया गया है। वर्तमान में यह ड्राफ्ट सार्वजनिक चर्चा के लिए उपलब्ध है और आरबीआई ने आम जनता के साथ-साथ सभी संबंधित पक्षों से 4 मार्च तक उनके सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। इन फीडबैक के आधार पर ही नियमों को अंतिम रूप देकर अगले साल जुलाई से लागू किया जाएगा। 

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!