दिल्ली विधानसभा में भारी हंगामा: आतिशी के बयान पर सिख गुरुओं के अपमान का आरोप

Edited By Updated: 08 Jan, 2026 09:50 AM

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दिल्ली विधानसभा में आज का दिन राजनीतिक गहमागहमी और भारी हंगामे के नाम रहा। विपक्ष की नेता आतिशी द्वारा दिए गए एक कथित बयान को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों ने सदन में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया। विवाद इतना बढ़ गया कि विधानसभा अध्यक्ष...

नेशनल डेस्क। दिल्ली विधानसभा में आज का दिन राजनीतिक गहमागहमी और भारी हंगामे के नाम रहा। विपक्ष की नेता आतिशी द्वारा दिए गए एक कथित बयान को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों ने सदन में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया। विवाद इतना बढ़ गया कि विधानसभा अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित करनी पड़ी।

विवाद की जड़: सिख गुरुओं के अपमान का आरोप

भाजपा विधायकों का आरोप है कि आतिशी ने अपने बयान में सिख गुरुओं का अपमान किया है जिससे समाज की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है। भाजपा नेता मनजिंदर सिंह सिरसा, अरविंदर सिंह लवली और तरविंदर सिंह मारवाह ने इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाया। उन्होंने आतिशी पर गुरु तेग बहादुर जी के अपमान का आरोप लगाया। विधायक कपिल मिश्रा सहित कई सदस्य हाथों में पोस्टर लेकर सदन के बीचों-बीच (वेल) आ गए। पोस्टरों पर ‘गुरुओं का अपमान नहीं सहेंगे’ जैसे नारे लिखे थे। सदन के भीतर मुख्यमंत्री केजरीवाल के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी की गई।

 

 

 

अध्यक्ष का निर्देश और आतिशी की अनुपस्थिति

हंगामे को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सख्त रुख अपनाया। अध्यक्ष ने कार्यवाही को पहले आधे घंटे के लिए रोका और आतिशी को एक घंटे के भीतर सदन में आकर अपनी सफाई देने का निर्देश दिया। जब सदन दोबारा शुरू हुआ तो आतिशी वहां मौजूद नहीं थीं। भाजपा विधायक मुकेश अहलावत ने दावा किया कि आतिशी गोवा चली गई हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कल तक जो नेता प्रदूषण पर चर्चा चाहती थीं आज वे शहर छोड़कर चली गईं। आतिशी की ओर से कोई सूचना न मिलने और सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच बढ़ते टकराव के कारण अध्यक्ष ने सदन को गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दिया।

आगे क्या?

विपक्ष अब आतिशी से सार्वजनिक माफी की मांग कर रहा है। भाजपा का कहना है कि जब तक इस विषय पर स्पष्टीकरण नहीं आता वे सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चलने देंगे। दूसरी ओर सरकार के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह केवल ध्यान भटकाने की राजनीति है।

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