Edited By Anu Malhotra,Updated: 10 Feb, 2026 03:42 PM

आयकर विभाग जल्द ही लेनदेन के तौर-तरीकों को पूरी तरह बदलने की तैयारी में है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने 'इनकम टैक्स एक्ट 2025' का एक नया मसौदा पेश किया है, जो आपकी गाड़ी खरीदने से लेकर बैंक में पैसे जमा करने तक के अनुभवों को बदल देगा। बजट...
नेशनल डेस्क: आयकर विभाग जल्द ही लेनदेन के तौर-तरीकों को पूरी तरह बदलने की तैयारी में है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने 'इनकम टैक्स एक्ट 2025' का एक नया मसौदा पेश किया है, जो आपकी गाड़ी खरीदने से लेकर बैंक में पैसे जमा करने तक के अनुभवों को बदल देगा। बजट 2026 के बाद आए इन प्रस्तावित नियमों का मुख्य उद्देश्य पुराने टैक्स ढांचे को आधुनिक बनाना और डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूती देना है। इसमें सबसे बड़ा बदलाव पैन कार्ड (PAN) की अनिवार्यता को लेकर किया गया है, जहां कुछ जगहों पर राहत दी गई है तो कुछ जगहों पर शिकंजा और कस दिया गया है।
बैंक खाते में कितना कैश डालने पर देना होगा PAN
अब तक के नियमों में अगर आप एक दिन में 50 हजार रुपये से ज्यादा नकद जमा करते थे, तो पैन कार्ड देना अनिवार्य होता था। लेकिन नए प्रस्ताव के अनुसार, अब फोकस 'एक दिन' के बजाय 'पूरे साल' पर होगा। अगर आप एक वित्तीय वर्ष में अपने एक या एक से अधिक खातों में कुल 10 लाख रुपये या उससे अधिक का कैश जमा करते हैं या निकालते हैं, तो आपको पैन की जानकारी देनी होगी। यह कदम उन लोगों के लिए बड़ी राहत हो सकता है जो कभी-कभी छोटे-मोटे नकद लेनदेन करते हैं, लेकिन बड़े ट्रांजैक्शन करने वालों पर अब विभाग की पैनी नजर रहेगी।
कार और बाइक खरीदना अब एक जैसा नहीं रहेगा
गाड़ी खरीदने के शौकीनों के लिए खबर मिली-जुली है। फिलहाल नियम यह है कि आप कितनी भी सस्ती कार खरीदें, पैन कार्ड दिखाना ही पड़ता है। लेकिन नए नियमों में 5 लाख रुपये तक की कार खरीदने पर पैन कार्ड की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, दोपहिया वाहनों यानी बाइक के लिए यह नियम थोड़ा सख्त हो गया है। अगर आप 5 लाख रुपये से महंगी लग्जरी बाइक खरीदते हैं, तो आपको अपना पैन नंबर दर्ज कराना होगा। पहले बाइक की खरीद पर ऐसी कोई स्पष्ट सीमा नहीं थी।
प्रॉपर्टी और लग्जरी खर्चों में मिली छूट
रियल एस्टेट के सेक्टर में सरकार ने बढ़ती कीमतों को देखते हुए थोड़ी ढील दी है। अब तक 10 लाख रुपये से ज्यादा की अचल संपत्ति खरीदने या बेचने पर पैन कार्ड अनिवार्य था, जिसे अब बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है। इसका मतलब है कि छोटे प्लॉट या मकान की रजिस्ट्री में अब कम कागजी कार्रवाई होगी। वहीं दूसरी ओर, अगर आप किसी बड़े इवेंट, होटल बिल या बैंक्वेट हॉल के लिए 1 लाख रुपये से ज्यादा का भुगतान करते हैं, तो वहां पैन देना होगा। पहले यह सीमा केवल 50 हजार रुपये थी, जिसे अब दोगुना कर दिया गया है।
डिजिटल करेंसी और क्रिप्टो पर सख्त रुख
सरकार अब डिजिटल ट्रांजैक्शन को पूरी तरह मुख्यधारा में लाने की कोशिश कर रही है। नए मसौदे में सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) यानी ई-रुपी को आधिकारिक तौर पर इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट की मान्यता दी गई है। साथ ही, क्रिप्टो करेंसी में निवेश करने वालों के लिए अब छिपना मुश्किल होगा। नए नियमों के तहत क्रिप्टो एक्सचेंजों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे अपने ग्राहकों के लेनदेन की पूरी जानकारी आयकर विभाग के साथ साझा करें। इसके अलावा कंपनियों द्वारा अपने कर्मचारियों को दी जाने वाली सुविधाओं (Perquisites) के मूल्यांकन के नियमों को भी अपडेट किया जा रहा है, जिससे आपकी टेक-होम सैलरी पर असर पड़ सकता है।