भारत और श्रीलंका गहरे सभ्यतागत व आध्यात्मिक बंधनों से बंधे हुए हैं: मोदी

Edited By Updated: 05 Feb, 2026 03:09 PM

india and sri lanka are bound by deep civilisational and spiritual bonds modi

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत और श्रीलंका "गहरे सभ्यतागत और आध्यात्मिक बंधनों" से बंधे हुए हैं। उन्होंने साथ ही कोलंबो में भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेषों की प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के लिए श्रीलंका के राष्ट्रपति...

नेशनल डेस्क: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत और श्रीलंका "गहरे सभ्यतागत और आध्यात्मिक बंधनों" से बंधे हुए हैं। उन्होंने साथ ही कोलंबो में भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेषों की प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के लिए श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के प्रति आभार व्यक्त किया। गुजरात के अरावल्ली जिले में स्थित देवनीमोरी पुरातात्विक स्थल से प्राप्त इन पवित्र अवशेषों की पहली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी कोलंबो के गंगारामया मंदिर में चार से 11 फरवरी तक आयोजित की जा रही है। बुधवार को गंगारामया मंदिर में आयोजित उद्घाटन समारोह में श्रीलंका के राष्ट्रपति दिसानायके, गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और राज्य के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी उपस्थित रहे। समारोह में गंगारामया मंदिर के मुख्य अधिष्ठाता वेन. किरिंदे असाजी थेरो भी मौजूद थे। श्रीलंका के राष्ट्रपति ने चार फरवरी को 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा, "आज भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को श्रीलंका में श्रद्धापूर्वक स्वीकार किया गया है जिन्हें11 फरवरी तक गंगारामया मंदिर में आम लोगों के दर्शन के लिए रखा जाएगा।''

उन्होंने कहा, '' प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारत सरकार का मैं आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने अपना वादा निभाया और इस पवित्र प्रदर्शनी को संभव बनाया।" उन्होंने पांच फरवरी से आम जनता के लिए शुरू हुई प्रदर्शनी की कुछ तस्वीरें भी साझा कीं। प्रधानमंत्री मोदी ने इस पोस्ट को साझा करते हुए लिखा, "कोलंबो के पवित्र गंगारामया मंदिर में देवनीमोरी के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के लिए राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके का आभार। अप्रैल 2025 में मेरी यात्रा के दौरान यह निर्णय लिया गया कि ये अवशेष श्रीलंका लाए जाएंगे, जिससे लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का अवसर मिलेगा। हमारे राष्ट्र गहरे सभ्यतागत और आध्यात्मिक बंधनों से जुड़े हुए हैं। भगवान बुद्ध का करुणा, शांति और सद्भाव का शाश्वत संदेश मानवता का मार्गदर्शन करता रहे।'' यह प्रदर्शनी प्रधानमंत्री मोदी की अप्रैल 2025 में श्रीलंका की यात्रा के दौरान की गई घोषणा के बाद आयोजित की गई है।

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कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग ने एक बयान में कहा कि यह आयोजन भारत और श्रीलंका के बीच गहरे आध्यात्मिक और सभ्यतागत संबंधों को दर्शाता है। उच्चायोग के अनुसार, चार फरवरी को श्रीलंका के 78वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पवित्र अवशेषों का कोलंबो पहुंचना ''इस कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान करता है।'' यह भारत के बाहर इन अवशेषों का पहला सार्वजनिक दर्शन है। इससे पहले भारत ने श्रीलंका में 2012 में कपिलवस्तु अवशेषों और 2018 में सारनाथ अवशेषों की प्रदर्शनी आयोजित की थी। भारतीय वायुसेना के विशेष विमान से पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ श्रीलंका पहुंचाए गए देवनीमोरी के पवित्र अवशेष मूल रूप से वडोदरा स्थित महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय में संरक्षित हैं।

भारतीय उच्चायोग के अनुसार, गुजरात का देवनीमोरी एक महत्वपूर्ण बौद्ध पुरातात्विक स्थल है, जहां खुदाई के दौरान एक 'स्तूप' मिला था जिसमें अस्थियों से भरी अवशेष पेटियां, एक तांबे का डिब्बा और सोने-चांदी की पतली चादरें पाई गईं। प्रधानमंत्री मोदी ने अप्रैल 2025 की यात्रा के दौरान अनुराधापुरा में 'सेक्रेड सिटी कॉम्प्लेक्स' परियोजना के विकास के लिए अनुदान की भी घोषणा की थी। यह 2020 में बौद्ध संबंधों को बढ़ावा देने के लिए घोषित 1.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर के अनुदान के अतिरिक्त है। 

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