Edited By Mehak,Updated: 10 Jan, 2026 12:36 PM

के.सी. त्यागी का जेडीयू में औपचारिक अध्याय समाप्त हो गया है। हालिया बयानों और गतिविधियों के कारण पार्टी ने उनसे दूरी बनाई है। उन्होंने नीतीश कुमार के लिए भारत रत्न की मांग और मुस्तफिजुर रहमान को समर्थन जैसे बयान दिए थे, जो जेडीयू को नागवार गुजरे। अब...
नेशनल डेस्क : जनता दल यूनाइटेड (JDU) के वरिष्ठ नेता के.सी. त्यागी अब पार्टी से औपचारिक रूप से अलग हो चुके हैं। पार्टी प्रवक्ता राजीव रंजन के हालिया बयान के अनुसार, के.सी. त्यागी और JDU के बीच अब कोई आधिकारिक संबंध नहीं बचा है। सूत्रों का कहना है कि यह अलगाव सम्मानजनक और आपसी सहमति से हुआ है।
पार्टी लाइन से अलग रुख और असंतोष
हाल के दिनों में त्यागी के कुछ बयानों और गतिविधियों को लेकर पार्टी के अंदर असंतोष की खबरें सामने आई थीं। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने JDU की आधिकारिक नीतियों और रुख से अलग रुख अपनाया, जिसके बाद नेतृत्व ने दूरी बनाने का निर्णय लिया।
नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग
के.सी. त्यागी ने हाल ही में बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के लिए भारत रत्न देने की मांग उठाई थी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस मांग की पैरवी की। त्यागी ने पत्र में लिखा कि जैसे पिछले साल चौधरी चरण सिंह और कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न मिला, वैसे नीतीश कुमार भी इसके हकदार हैं। JDU नेतृत्व ने इस मांग को आधिकारिक स्टैंड नहीं माना और कहा कि यह त्यागी का निजी बयान है, पार्टी का नहीं।
पार्टी ने नहीं की अनुशासनात्मक कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार, त्यागी के साथ सम्मानजनक अलगाव हो चुका है, लेकिन पार्टी ने फिलहाल उनके खिलाफ कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं करने का फैसला किया है। यह इसलिए किया गया क्योंकि के.सी. त्यागी का पार्टी के साथ लंबा और पुराना संबंध रहा है।
अब त्यागी JDU का प्रतिनिधित्व नहीं करेंगे
के.सी. त्यागी अब जेडीयू की नीतियों, फैसलों और आधिकारिक बयान का प्रतिनिधित्व नहीं करेंगे। भविष्य में पार्टी की ओर से जारी होने वाले राजनीतिक रुख और बयान में उनका कोई दखल नहीं होगा।
विवादित बयान और हलकों की प्रतिक्रिया
हाल ही में त्यागी ने मुस्तफिजुर रहमान के समर्थन में भी बयान दिया था, जिसमें उन्होंने कहा कि खेल में राजनीति नहीं लानी चाहिए और भारत को भी उन्हें खेलने की अनुमति देनी चाहिए। जेडीयू नेतृत्व को यह बयान नागवार गुजरा।