कर्नाटक में हुक्का बार और खुले में गुटखा थूकने पर सख्ती, अब देना होगा भारी जुर्माना

Edited By Updated: 31 May, 2025 04:57 PM

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कर्नाटक सरकार की यह सख्त नीति तंबाकू की बढ़ती लत पर एक निर्णायक प्रहार के रूप में देखी जा रही है। यदि अन्य राज्य भी इसी तरह के कड़े कानून लागू करें, तो पूरे देश में तंबाकू से होने वाली बीमारियों और सामाजिक समस्याओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

नेशनल डेस्क: कर्नाटक सरकार ने युवाओं को तंबाकू और उससे जुड़ी आदतों से दूर रखने के उद्देश्य से एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। अब राज्य में हुक्का बार पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिए गए हैं, और 21 वर्ष से कम आयु के युवाओं को सिगरेट या अन्य तंबाकू उत्पाद बेचना गैरकानूनी होगा। साथ ही, खुले में गुटखा थूकना या सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करना अब आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है, क्योंकि इसके लिए अब 1000 रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ेगा।

क्या है नया संशोधित कानून?
यह नया नियम "सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम 2024" के अंतर्गत लागू किया गया है, जिसे हाल ही में राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल चुकी है। यह कानून पहले फरवरी 2024 में कर्नाटक विधानसभा और विधान परिषद दोनों से पास हुआ था। इस संशोधन को लागू करने के लिए 2003 के केंद्रीय कानून में बदलाव किया गया है।

मुख्य प्रावधान क्या हैं?

  • तंबाकू उत्पादों की बिक्री की न्यूनतम आयु सीमा 18 से बढ़ाकर 21 वर्ष कर दी गई है।
  • राज्य में हुक्का बार पूरी तरह से प्रतिबंधित हैं। कोई भी रेस्टोरेंट, बार, पब या कैफे अब हुक्का सर्व नहीं कर पाएगा।
  • किसी भी शैक्षणिक संस्थान के 100 मीटर के दायरे में सिगरेट या तंबाकू उत्पादों की बिक्री नहीं की जा सकेगी।

सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान और गुटखा थूकना पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है।

कानून का उल्लंघन करने पर क्या सजा?
हुक्का बार चलाने वालों के लिए सख्त सजा:

  • 1 से 3 साल की जेल
  • ₹50,000 से ₹1 लाख तक जुर्माना
  • सार्वजनिक स्थान पर गुटखा थूकने या धूम्रपान करने पर:
  • पहले जुर्माना ₹200 था, जिसे अब बढ़ाकर ₹1,000 कर दिया गया है।

युवाओं की सेहत और स्कूलों की सुरक्षा पर ध्यान
इस कानून का एक बड़ा मकसद यह भी है कि युवाओं को कम उम्र में तंबाकू की लत से बचाया जा सके। खासकर स्कूलों और कॉलेजों के आसपास तंबाकू उत्पादों की उपलब्धता पर रोक लगाकर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि विद्यार्थी इस लत से दूर रहें।

सरकार की मंशा और जनस्वास्थ्य पर असर
कर्नाटक सरकार का यह कदम न केवल स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि राज्य की सार्वजनिक स्वच्छता और सामाजिक जिम्मेदारी के नजरिए से भी एक सकारात्मक पहल है। तंबाकू से जुड़े रोगों का भार स्वास्थ्य तंत्र पर बहुत भारी होता है। सरकार का कहना है कि ये कड़े कानून नशे के प्रसार पर नियंत्रण करेंगे और युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली की ओर प्रेरित करेंगे।

लोगों से अपील
राज्य सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे इन नए प्रावधानों का पालन करें और एक स्वच्छ, स्वस्थ और तंबाकू-मुक्त समाज के निर्माण में सहयोग दें। विशेष रूप से युवाओं से आग्रह किया गया है कि वे नशे की आदतों से दूर रहें और अपने आस-पास के वातावरण को भी साफ-सुथरा बनाए रखें।

 

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