मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने जातीय हिंसा के 2 साल बाद दिया इस्तीफा

Edited By Updated: 09 Feb, 2025 09:59 PM

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मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने राज्य में जातीय हिंसा के लगभग दो साल बाद अपना इस्तीफा दे दिया है। राज्य में हिंसा के बाद कई मुद्दों को लेकर उनकी सरकार पर आलोचना हो रही थी।

नेशनल डेस्क : मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने रविवार को राजभवन में राज्यपाल अजय कुमार भल्ला को अपना इस्तीफा सौंप दिया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। सिंह ने राज्यपाल को लिखे अपने पत्र में कहा, ‘‘अब तक मणिपुर के लोगों की सेवा करना मेरे लिए सम्मान की बात रही है। मैं प्रत्येक मणिपुरी के हितों की रक्षा के लिए समय पर की गई कार्रवाई, विकास कार्यों और विभिन्न परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए केंद्र सरकार का बहुत आभारी हूं।''

पत्र में कहा गया है, ‘‘आपके कार्यालय के माध्यम से केंद्र सरकार से मेरा विनम्र अनुरोध है कि इसे जारी रखा जाए। मैं इस अवसर पर उनमें से सबसे महत्वपूर्ण कार्यों को गिनाना चाहता हूं... मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखना, जिसका हजारों वर्षों से समृद्ध और विविध सभ्यतागत इतिहास रहा है।'' उन्होंने केंद्र से सीमा पर घुसपैठ को लेकर कार्रवाई जारी रखने और अवैध प्रवासियों के निर्वासन और मादक पदार्थों के खिलाफ लड़ाई के लिए नीति तैयार करने का भी अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह ‘‘मुक्त आवागमन व्यवस्था(एफएमआर) की पूर्ण सुरक्षित संशोधित प्रणाली को जारी रखे, जिसमें बायोमेट्रिक प्रणाली को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए और सीमा पर त्वरित गति से निगरानी की जाए।'' यह घटनाक्रम उनके दिल्ली से लौटने के कुछ ही घंटों बाद हुयी है। सिंह ने शनिवार को मुख्यमंत्री सचिवालय में भाजपा नीत सत्तारूढ़ गठबंधन के विधायकों के साथ बैठक की थी। यह बैठक विपक्षी दल कांग्रेस द्वारा सिंह के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की मांग के मद्देनजर आयोजित की गई थी।

मई 2023 में राज्य में जातीय हिंसा भड़कने के बाद से 250 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं। इस बीच, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ए शारदा ने पुष्टि की कि मुख्यमंत्री सिंह ने राज्य के लोगों के हित में राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। शारदा ने कहा कि सिंह ने राज्य के विकास और अखंडता के लिए अथक प्रयास किया। उन्होंने कहा, ‘‘वह तीन मई, 2023 को जातीय हिंसा भड़कने के बाद से राज्य में शांति लाने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा राज्य की अखंडता के लिए कड़ी मेहनत करती रहेगी।''

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