Edited By Pooja Gill,Updated: 05 Apr, 2026 11:03 AM

नेशनल डेस्क: भारत में अब दुश्मन के बंकर, एयरबेस, रनवे और गोदाम जैसे अहम ठिकानों को निशाना बनाने के लिए अमरीकी एमके-84 जैसे करीब 1000 किलो के शक्तिशाली स्वदेशी...
नेशनल डेस्क: भारत में अब दुश्मन के बंकर, एयरबेस, रनवे और गोदाम जैसे अहम ठिकानों को निशाना बनाने के लिए अमरीकी एमके-84 जैसे करीब 1000 किलो के शक्तिशाली स्वदेशी एरियल बम बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। भारतीय वायु सेना ने इसके लिए कंपनियों से रुचि की अभिव्यक्ति (EOI) मांगी है। इस परियोजना में शर्त रखी गई है कि बम बनाने में कम से कम 50% सामग्री स्वदेशी होनी चाहिए। अगर प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो वायु सेना करीब 600 बम खरीद सकती है। फिलहाल भारत यह जनरल पर्पज बम आयात करता है। यह योजना ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत शुरू की जा रही है।
इस काम को पूरा करने में लगेंगे ढाई साल
इस काम को दो चरणों में पूरा किया जाएगा और इसमें लगभग ढाई साल लगेंगे। पहले चरण में डमी और असली प्रोटोटाइप बनाए जाएंगे। तकनीकी जांच में सफल होने के बाद बड़े स्तर पर उत्पादन शुरू होगा। इस प्रोजेक्ट में सरकारी और निजी दोनों तरह की कंपनियां भाग ले सकती हैं, और जरूरत पड़ने पर विदेशी कंपनियों के साथ साझेदारी भी कर सकती हैं।
जानिए क्यों खास है Mk-84 हवाई बम
इस बम में बहुत ज्यादा विस्फोटक शक्ति होती है जिससे बड़ा धमाका और नुकसान होता है। दुश्मन के बंकर, इमारत, रनवे, गोदाम जैसे मजबूत ठिकानों को नष्ट करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। Mk-84 को आधुनिक सिस्टम के साथ जोड़कर इसे प्रिसिंसन (सटीक) बम भी बनाया जा सकता है। यह बम आधुनिक तकनीक से लैस होकर प्रिसिजन स्ट्राइक (सटीक हमला) करने में भी सक्षम हो सकता है, जिससे दुश्मन को भारी नुकसान पहुंचाया जा सकता है।