Edited By Anu Malhotra,Updated: 05 Feb, 2026 03:03 PM

कल्पना कीजिए कि आप मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे जैसे आधुनिक रास्ते पर हों और अचानक आपकी गाड़ी घंटों तक एक ही जगह थम जाए। पुणे के मशहूर उद्योगपति सुधीर मेहता के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। जब जाम ने उनके धैर्य की परीक्षा ली और 8 घंटे बीतने के बाद भी रास्ता नहीं...
नेशनल डेस्क: कल्पना कीजिए कि आप मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे जैसे आधुनिक रास्ते पर हों और अचानक आपकी गाड़ी घंटों तक एक ही जगह थम जाए। पुणे के मशहूर उद्योगपति सुधीर मेहता के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। जब जाम ने उनके धैर्य की परीक्षा ली और 8 घंटे बीतने के बाद भी रास्ता नहीं खुला, तो उन्होंने अपनी गाड़ी सड़क पर ही छोड़ी और सीधे हेलीकॉप्टर मंगवाकर हवा के रास्ते पुणे वापस लौट गए।
गैस टैंकर ने रोका लाखों का रास्ता
मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर यह मुसीबत तब शुरू हुई जब एक गैस टैंकर पलट गया। टैंकर से ज्वलनशील प्रोपलीन गैस के रिसाव के डर से प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से ट्रैफिक को पूरी तरह रोक दिया। नतीजा यह हुआ कि 20 किलोमीटर लंबा जाम लग गया और हजारों लोग बिना खाने-पानी के 18-18 घंटों तक फंसे रहे।
सुधीर मेहता का '10 लाख वाला' सुझाव
पिनेकल इंडस्ट्रीज के चेयरमैन सुधीर मेहता ने जाम और अपने हेलीकॉप्टर की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करते हुए सरकार को एक बड़ा सुझाव दिया। उन्होंने लिखा कि एक्सप्रेसवे जैसे हाई-स्पीड रास्तों पर इमरजेंसी के लिए हेलीपैड का होना बहुत जरूरी है। उनके मुताबिक:
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एक हेलीपैड बनाने में सिर्फ ₹10 लाख का खर्च आता है।
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इसके लिए महज एक एकड़ जमीन की जरूरत होती है।
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ऐसी आपातकालीन स्थितियों में बीमार लोगों या फंसे हुए यात्रियों को निकालने के लिए यह वरदान साबित हो सकता है।
33 घंटे बाद मिली राहत
मंगलवार शाम को हुए इस हादसे के बाद एक्सप्रेसवे की स्थिति बेहद खराब हो गई थी। बच्चों और महिलाओं समेत लाखों लोग रात भर सड़क पर ही फंसे रहे। आखिरकार, टैंकर को सुरक्षित हटाए जाने के बाद गुरुवार सुबह करीब 33 घंटे बाद इस रास्ते पर दोबारा गाड़ियों की आवाजाही शुरू हो सकी। मेहता ने इस घटना को व्यवस्था की कमी बताया और कहा कि एक्सप्रेसवे पर ऐसे 'एग्जिट पॉइंट' होने चाहिए जहाँ से जाम में फंसी गाड़ियों को वापस मोड़ा जा सके। उनकी यह 'हेलीकॉप्टर यात्रा' अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है।