Edited By Mehak,Updated: 28 Jan, 2026 06:30 PM

अचानक बैठी या लेटी अवस्था से खड़े होने पर चक्कर आना या आंखों के आगे अंधेरा छा जाना ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन का संकेत हो सकता है। यह तब होता है जब शरीर ब्लड प्रेशर को तुरंत संतुलित नहीं कर पाता और दिमाग तक पर्याप्त खून नहीं पहुंचता। डिहाइड्रेशन, खून...
नेशनल डेस्क : अगर आप कुर्सी या बिस्तर से अचानक उठते ही चक्कर महसूस करते हैं, आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है या गिरने जैसा लगता है, तो इसे नजरअंदाज न करें। यह समस्या आम जरूर है, लेकिन इसके पीछे एक गंभीर मेडिकल वजह हो सकती है। इस स्थिति को Orthostatic Hypotension या Postural Hypotension कहा जाता है।
क्या होता है ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन? (Orthostatic Hypotension)
जब कोई व्यक्ति बैठी या लेटी अवस्था से अचानक खड़ा होता है, तो गुरुत्वाकर्षण के कारण शरीर का खून पैरों की ओर चला जाता है। सामान्य तौर पर शरीर की नसें सिकुड़कर और दिल की धड़कन बढ़ाकर दिमाग तक खून की सप्लाई बनाए रखती हैं। लेकिन जब यह प्रक्रिया सही ढंग से काम नहीं करती, तो दिमाग तक पर्याप्त खून नहीं पहुंच पाता और चक्कर, धुंधलापन या बेहोशी जैसा महसूस होता है।
एक्सपर्ट क्या कहते हैं?
एक न्यूरोलॉजिस्ट के अनुसार, शरीर की ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम इस संतुलन को संभालती है। अगर इसकी प्रतिक्रिया धीमी हो जाए, तो खड़े होते ही चक्कर आ सकता है। वहीं डायटीशियन का कहना है कि शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी भी इस समस्या को बढ़ा सकती है।
किन कारणों से बढ़ता है खतरा?
- शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन)
- खून की कमी (एनीमिया)
- लंबे समय तक बिस्तर पर रहना
- कुछ दवाइयों का असर
- बढ़ती उम्र के साथ शरीर की प्रतिक्रिया क्षमता कम होना
रिसर्च में यह भी सामने आया है कि खड़े होने के बाद पहले एक मिनट में अगर ब्लड प्रेशर तेजी से गिरता है, तो भविष्य में डिमेंशिया का खतरा बढ़ सकता है।
कब डॉक्टर से मिलना जरूरी है?
अगर किसी व्यक्ति को बार-बार खड़े होते ही चक्कर आते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। खासकर बुजुर्गों में यह समस्या गिरने, हड्डी टूटने और गंभीर चोट का कारण बन सकती है।
कैसे करें बचाव?
- धीरे-धीरे खड़े हों
- दिनभर पर्याप्त पानी पिएं
- पैरों की हल्की एक्सरसाइज करें
- फिसलन वाली जगहों से बचाव करें
- डॉक्टर से दवाओं की समीक्षा कराएं
समय रहते ध्यान देने और सही लाइफस्टाइल अपनाने से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।