Antibiotic Medicines: दवाई खरीदते वक्त अब नहीं होगी गलती! रैपर देखकर पहचान सकेंगे एंटीबायोटिक

Edited By Updated: 07 Jan, 2026 11:22 AM

now medicines will have a special identification on their wrappers

क्या आप जानते हैं कि बिना जरूरत के खाई गई एंटीबायोटिक दवाइयां आपके शरीर के लिए जहर बन सकती हैं? केंद्र सरकार अब एक ऐसी योजना पर काम कर रही है जिससे साधारण लोग भी दवा के पत्ते (रैपर) को देखते ही समझ जाएंगे कि वह एंटीबायोटिक मेडिसिन है या नहीं। सरकार...

Antibiotic Medicines: क्या आप जानते हैं कि बिना जरूरत के खाई गई एंटीबायोटिक दवाइयां आपके शरीर के लिए जहर बन सकती हैं? केंद्र सरकार अब एक ऐसी योजना पर काम कर रही है जिससे साधारण लोग भी दवा के पत्ते (रैपर) को देखते ही समझ जाएंगे कि वह एंटीबायोटिक मेडिसिन है या नहीं। सरकार का उद्देश्य एंटीबायोटिक दवाओं के बेहिसाब इस्तेमाल और उससे होने वाले खतरों से जनता को बचाना है।

रैपर पर क्या होगा बदलाव?

अभी तक लोग दवाओं के नाम पढ़कर यह नहीं समझ पाते कि वह एंटीबायोटिक है लेकिन जल्द ही पैकेजिंग पर निम्नलिखित बदलाव दिख सकते हैं। एंटीबायोटिक दवाओं के लिए एक विशेष रंग (जैसे लाल या कोई अन्य विशिष्ट रंग) तय किया जा सकता है। दवाओं पर क्यूआर कोड (QR Code) या खास लोगो लगाया जाएगा ताकि फार्मासिस्ट और मरीज तुरंत उसकी पहचान कर सकें। पैकेट पर साफ शब्दों में लिखा होगा कि यह एक एंटीबायोटिक है और इसे बिना डॉक्टर की सलाह के न लें।

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क्यों जरूरी है यह कदम? (AMR का खतरा)

देश में एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) की समस्या तेजी से बढ़ रही है।

  1. प्रतिरोधक क्षमता: जब हम बिना जरूरत के बार-बार एंटीबायोटिक खाते हैं तो हमारे शरीर के बैक्टीरिया उन दवाओं के खिलाफ 'प्रतिरोध' (Resistance) विकसित कर लेते हैं।

  2. बेअसर होती दवाएं: इसका परिणाम यह होता है कि जब भविष्य में कोई गंभीर संक्रमण होता है तो सबसे शक्तिशाली एंटीबायोटिक भी शरीर पर असर नहीं करती।

  3. जानलेवा स्थिति: इसके चलते मामूली बुखार या संक्रमण भी जानलेवा साबित हो सकता है क्योंकि बैक्टीरिया को मारने वाली दवाएं नाकाम हो जाती हैं।

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पीएम मोदी ने 'मन की बात' में जताई चिंता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं इस गंभीर विषय पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने 'मन की बात' कार्यक्रम में एक उदाहरण साझा किया था जिसमें दिल्ली की एक महिला पर 15 से अधिक एंटीबायोटिक दवाएं बेअसर हो गई थीं। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अपील की है कि वे 'सेल्फ-मेडिकेशन' (बिना डॉक्टर के दवा लेना) से बचें।

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राष्ट्रीय जागरूकता अभियान की शुरुआत

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और CDSCO (केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन) जल्द ही इसके लिए नए दिशा-निर्देश जारी करेंगे।

  • जागरूकता: पूरे देश में कैंपेन चलाकर लोगों को एंटीबायोटिक के साइड इफेक्ट्स के बारे में बताया जाएगा।

  • सख्ती: मेडिकल स्टोर्स पर बिना पर्चे के एंटीबायोटिक बेचने पर और अधिक कड़ाई की जा सकती है।

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