Edited By Anu Malhotra,Updated: 14 May, 2025 07:11 AM

ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत द्वारा किए गए हवाई हमलों के बाद पाकिस्तान के एक कथित परमाणु ठिकाने के क्षतिग्रस्त होने की खबरों ने पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है। इस बीच सोशल मीडिया और गूगल पर “न्यूक्लियर रेडिएशन” जैसे शब्दों की खोज में जबरदस्त उछाल...
नेशनल डेस्क : ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत द्वारा किए गए हवाई हमलों के बाद पाकिस्तान के एक कथित परमाणु ठिकाने के क्षतिग्रस्त होने की खबरों ने पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है। इस बीच सोशल मीडिया और गूगल पर “न्यूक्लियर रेडिएशन” जैसे शब्दों की खोज में जबरदस्त उछाल आया है। सबसे बड़ा सवाल अब ये है—अगर वाकई पाकिस्तान में न्यूक्लियर रेडिएशन लीक हुआ, तो क्या इसका असर भारत पर भी पड़ सकता है? क्या सीमा पार परमाणु ज़हर भारत की हवा, पानी और मिट्टी को भी छू सकता है? चेरनोबिल और हिरोशिमा जैसी त्रासदियों के इतिहास को देखते हुए यह खतरा जितना अदृश्य है, उतना ही विनाशकारी भी। आइए समझते हैं, रेडिएशन लीक की सच्चाई और इससे भारत को कितना खतरा हो सकता है।
अदृश्य खतरा: जब रेडिएशन बन जाए मौत की परछाई
परमाणु विकिरण यानी न्यूक्लियर रेडिएशन, एक ऐसा खतरनाक असर है जो ना दिखाई देता है, ना ही तुरंत समझ आता है, लेकिन इसके परिणाम विनाशकारी होते हैं। जब कोई परमाणु ठिकाना प्रभावित होता है, तो सबसे पहले शरीर में Acute Radiation Syndrome (ARS) के लक्षण दिखाई देते हैं—जैसे उल्टी, त्वचा जलना, कमजोरी और गंभीर मामलों में कुछ ही घंटों में मौत। चेरनोबिल हादसा (1986) इसका सबसे भयानक उदाहरण है, जहां पहले ही सप्ताह में कई लोगों की जान चली गई थी।
रेडिएशन का दूरगामी असर: पीढ़ियों को बना देता है बीमार
रेडिएशन का असर केवल मौके पर मौजूद लोगों तक सीमित नहीं रहता। यह हवा, मिट्टी और पानी के माध्यम से दूर-दराज के क्षेत्रों में भी फैल सकता है। इसके प्रभाव से DNA क्षतिग्रस्त हो जाता है, जिससे कैंसर, थायरॉइड समस्याएं, बांझपन और जन्मजात विकलांगताएं बढ़ जाती हैं। जापान के हिरोशिमा और नागासाकी में 1945 के परमाणु हमलों के बाद इसका असर आज भी वहां की अगली पीढ़ियों पर देखा जा रहा है।
भारत के लिए खतरा? या पूरी तैयारी?
अगर पाकिस्तान का कोई परमाणु अड्डा वाकई ऑपरेशन सिंदूर में प्रभावित हुआ है, तो भारत को सतर्क रहने की जरूरत है। अच्छी बात यह है कि भारत के पास रेडिएशन मॉनिटरिंग टेक्नोलॉजी, आपातकालीन टीमें और सुरक्षा प्रोटोकॉल पहले से मौजूद हैं। किसी भी संभावित खतरे की स्थिति में वैज्ञानिकों और सुरक्षा एजेंसियों के पास त्वरित कार्रवाई की क्षमता है।
अफवाहों से बचें, सतर्क रहें
सबसे जरूरी बात यह है कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर अफवाहों से बचा जाए। आम जनता को सही और वैज्ञानिक जानकारी दी जानी चाहिए ताकि डर का माहौल न बने। परमाणु विकिरण का खतरा असली है, लेकिन डर से नहीं, समझदारी और तैयारी से ही इसका सामना किया जा सकता है।