Edited By Radhika,Updated: 19 May, 2025 04:14 PM

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का बदला लेते हुए भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन सिंदूर' को अंजाम दिया। इसका मकसद पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देना था। इस ऑपरेशन के बाद से चीन, अमेरिका और तुर्किए भी बेचैन दिख रहे हैं। भारत ने इस सैन्य कार्रवाई से...
नेशनल डेस्क: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का बदला लेते हुए भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन सिंदूर' को अंजाम दिया। इसका मकसद पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देना था। इस ऑपरेशन के बाद से चीन, अमेरिका और तुर्किए भी बेचैन दिख रहे हैं। भारत ने इस सैन्य कार्रवाई से अपनी रणनीतिक, तकनीकी और कूटनीतिक ताकत का लोहा पूरी दुनिया को मनवाया है।
पाक के ठिकाने ध्वस्त:
7 मई की रात को शुरू हुए ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और PoK में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। भारतीय सेना ने महज 23 मिनट के अंदर पाकिस्तान के प्रमुख एयरबेस, नूर खान और रहीम यार खान को तबाह कर दिया।
स्वदेशी हथियारों का दम:
इस ऑपरेशन में भारत ने ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम और लॉइटरिंग म्यूनिशन जैसे स्वदेशी हथियारों का इस्तेमाल किया, जिससे भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता दुनिया के सामने उजागर हुई। इस तरह के आधुनिक हथियारों से किए गए हमले ने न केवल पाकिस्तान, बल्कि अमेरिका और चीन जैसे शक्तिशाली देशों को भी हैरान कर दिया।
चीन: सैन्य और कूटनीतिक झटका:
पाकिस्तान का 'सदाबहार दोस्त' चीन ऑपरेशन सिंदूर से कई स्तरों पर प्रभावित हुआ है। उसे यह स्पष्ट संदेश मिला है कि भारत को अब कमजोर नहीं आंका जा सकता और किसी भी आक्रामक रवैये का करारा जवाब मिलेगा। ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना ने चीन के HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम और PL-15 मिसाइलों को निष्क्रिय कर दिया, जिन पर पाकिस्तान ने भरोसा किया था। इसके विपरीत, भारतीय S-400 मिसाइल प्रणाली पाकिस्तानी मिसाइलों से देश की रक्षा करने में सफल रही। इससे चीनी हथियारों की विश्वसनीयता पर सवाल उठे और उसके रक्षा निर्यात बाजार को झटका लगा, जिसके चलते चीनी रक्षा कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई।
भारत ने ऑपरेशन की सफलता की ब्रीफिंग के लिए 70 देशों के मिलिट्री डिप्लोमेट को आमंत्रित किया। इसमें चीन आमंत्रित नहीं था। चीन ने अपने मीडिया के जरिए भारत के खिलाफ दुष्प्रचार किया, जिसका भारत ने प्रभावी ढंग से खंडन किया।

अमेरिका: कूटनीतिक उलझन-
भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ रणनीतिक संबंध रखने वाला अमेरिका ऑपरेशन सिंदूर के बाद कूटनीतिक रूप से उलझन में पड़ गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम की अपील की और कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता की पेशकश की, जिसे भारत ने सिरे से खारिज कर दिया। भारत ने स्पष्ट किया कि कश्मीर उसका आंतरिक मामला है और किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार्य नहीं है।
तुर्किए: सहयोगी की भूमिका और बायकॉट का सामना:
तुर्की ने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान का खुलकर समर्थन किया, जिसके कारण उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। तुर्की ने पाकिस्तान को 350 से अधिक ड्रोन और सैन्य सलाहकार भेजे थे, जिनमें से दो की मौत की खबरें हैं। भारतीय सेना द्वारा तुर्की के ड्रोन को मार गिराने और उनके मलबे की तस्वीरें सार्वजनिक करने से तुर्किए की स्थिति कमजोर हुई है।
तुर्की के पाकिस्तान के समर्थन के कारण भारत में आक्रोश है। भारतीय नागरिकों और व्यापारियों ने तुर्की के उत्पादों, विशेष रूप से सेबों का बहिष्कार शुरू कर दिया है। तुर्की जाने वाली यात्राएं भी रद्द की जा रही हैं। तुर्किए की क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ावा देने वाली नीति ने उसे भारत जैसे उभरते शक्ति केंद्र के सामने कमजोर कर दिया है। यह स्पष्ट है कि भारत भी तुर्की के खास दुश्मनों के साथ वैसा ही व्यवहार करेगा जैसा उसने पाकिस्तान के साथ किया है।