Edited By Radhika,Updated: 14 Jan, 2026 02:40 PM

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को कहा कि प्रकृति के साथ सौहार्दपूर्ण संतुलन का संदेश देने वाला पोंगल अब वैश्विक पर्व बन गया है और दुनियाभर में तमिल समुदाय के लोगों ने इसे संजोकर रखा है। प्रधानमंत्री ने यहां केंद्रीय सूचना और प्रसारण राज्य...
नेशनल डेस्क: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को कहा कि प्रकृति के साथ सौहार्दपूर्ण संतुलन का संदेश देने वाला पोंगल अब वैश्विक पर्व बन गया है और दुनियाभर में तमिल समुदाय के लोगों ने इसे संजोकर रखा है। प्रधानमंत्री ने यहां केंद्रीय सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री एल मुरुगन के आवास पर आयोजित पोंगल उत्सव में भाग लिया। मोदी ने कहा कि इस पर्व पर किसानों के परिश्रम का उत्सव मनाया जाता है और पृथ्वी तथा सूर्य के प्रति कृतज्ञता प्रकट की जाती है। समारोह में कई केंद्रीय मंत्री, नौकरशाह और अन्य वर्गों के लोग शामिल हुए।
प्रधानमंत्री ने कहा,‘‘पोंगल का त्योहार हमें याद दिलाता है कि आभार शब्दों से आगे बढ़कर जताया जाना चाहिए और हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का एक जरूरी हिस्सा बन जाना चाहिए। जब धरती हमें इतना कुछ देती है, तो यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम इसे संजोएं और इसकी रक्षा करें।'' उन्होंने कहा कि दुनियाभर में तमिल समुदाय और तमिल संस्कृति को संजोने वाले लोग बड़े उत्साह से पोंगल मनाते हैं और उनके बीच आकर वह गौरव की अनुभूति कर रहे हैं। मोदी ने कहा कि तमिल संस्कृति दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है और इसमें सदियों की बुद्धिमत्ता और परंपरा है जो इतिहास से सबक लेकर भविष्य का रास्ता दिखाती है। उन्होंने कहा, ‘‘इस विरासत से प्रेरणा लेते हुए आज का भारत आगे बढ़ने में इसकी सांस्कृतिक जड़ों से मजबूती लेता है।
पोंगल के इस शुभ अवसर पर हम महसूस कर रहे हैं कि भारत को आगे बढ़ाने वाली विश्वास और एकता की भावना इसकी संस्कृति से गहराई से जुड़ी है और इस धरा के लिए अपार सम्मान रखती है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि पोंगल का पर्व प्रकृति, परिवार और समाज के बीच सौहार्दपूर्ण संतुलन बनाकर रखने के महत्व पर जोर देता है। उन्होंने कहा, ‘‘मिट्टी की सेहत को बनाकर रखना, जल संरक्षित करना और भावी पीढ़ियों के लिए संसाधनों का विवेकपूर्ण इस्तेमाल आवश्यक हैं। मिशन ‘लाइफ', ‘एक पेड़ मां के नाम' और अमृत सरोवर जैसी पहल इसी भावना पर आधारित हैं और ये हमें इन मूल्यों को कायम रखने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।'' मोदी ने कहा कि पोंगल लोगों को सिखाता है कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि दैनिक जीवन का हिस्सा भी होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘आज पोंगल वैश्विक पर्व बन गया है।
पिछले साल मुझे तमिल संस्कृति से जुड़े अनेक कार्यक्रमों में शामिल होने का अवसर मिला, जो न केवल भारत की बल्कि पूरे विश्व की साझा विरासत है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि तमिल संस्कृति में किसान को जीवन का आधार माना जाता है। उन्होंने कहा, ‘‘तिरुक्कुरल (तमिल काव्य) में कृषि और किसानों के महत्व के बारे में विस्तार से बताया गया है।'' इससे पहले तमिलनाडु के लोगों और दुनिया भर में रह रहे तमिल समुदाय के लोगों को पोंगल पर बधाई देते हुए प्रधानमंत्री ने तमिल और अंग्रेजी भाषा में लिखे एक पत्र में कहा कि पोंगल उन सभी लोगों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भी अवसर है जो अपने परिश्रम से हमारे जीवन को समृद्ध बनाते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘ प्रिय देशवासियों, वणक्कम (नमस्कार)! पोंगल के शुभ अवसर पर मैं आपको और आपके परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। यह विशेष त्योहार हमें मानव श्रम और प्रकृति के बीच घनिष्ठ संबंध की याद दिलाता है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि यह त्योहार कृषि, मेहनतकश किसानों, ग्रामीण जीवन और काम की गरिमा से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि परिवार पारंपरिक व्यंजन बनाने और खुशी साझा करने के लिए एक साथ आते हैं, इससे संबंध मजबूत होते हैं और एकजुटता की भावना प्रबल होती है। उन्होंने कहा, ‘‘हमें इस बात पर गर्व है कि विश्व की सबसे प्राचीन भाषा, तमिल का जन्म हमारे देश में हुआ।
पोंगल को एक वैश्विक त्योहार के रूप में उभरते देखना खुशी की बात है। तमिलनाडु में, भारत के विभिन्न हिस्सों में और विश्व भर में रह रहे तमिल समुदाय के लोग इस पर्व को पूरे उत्साह के साथ मनाते हैं।'' प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ आप सभी को एक बार फिर पोंगल की हार्दिक शुभकामनाएं। यह त्योहार सभी के जीवन में समृद्धि, सफलता और अच्छा स्वास्थ्य लाए।'' तमिलनाडु में इस साल विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री की तमिल समुदाय के लोगों के बीच उपस्थिति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।