Tatkal ticket window: रेलवे यात्रियों के लिए बड़ी खबर: तत्काल टिकट की झंझट का निकला इलाज...

Edited By Updated: 05 Jun, 2025 09:48 AM

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हर दिन सुबह 10 बजे लाखों रेल यात्रियों के लिए एक तनावपूर्ण मुकाबला शुरू होता है — IRCTC की तत्काल टिकट बुकिंग विंडो खुलते ही मानो पूरा देश वेबसाइट पर टूट पड़ता है। कुछ ही सेकंड में साइट धीमी हो जाती है, कई बार हैंग तक कर जाती है और जब तक रिफ्रेश...

नेशनल डेस्क: हर दिन सुबह 10 बजे लाखों रेल यात्रियों के लिए एक तनावपूर्ण मुकाबला शुरू होता है - IRCTC की तत्काल टिकट बुकिंग विंडो खुलते ही मानो पूरा देश वेबसाइट पर टूट पड़ता है। कुछ ही सेकंड में साइट धीमी हो जाती है, कई बार हैंग तक कर जाती है और जब तक रिफ्रेश करते हैं, सीटें वेटिंग में जा चुकी होती हैं। यात्रियों की इस रोज़मर्रा की परेशानी पर अब एक चर्चित उद्यमी डॉ. ए. वेलुमणि ने अपनी प्रतिक्रिया दी है, जो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।

क्या कहा डॉ. वेलुमणि ने?

थायरोकेयर के संस्थापक और सफल कारोबारी डॉ. ए. वेलुमणि ने IRCTC की तत्काल टिकट प्रक्रिया को एक हास्य-भरे लेकिन गंभीर लहजे में “डेली ड्रामा” बताया। उन्होंने लिखा: “9:59 तक सीट्स अवेलेबल होती हैं, 10:00 बजे साइट हैंग हो जाती है, 10:03 तक सब टिकट बुक हो जाते हैं और 10:04 पर साइट फिर से स्मूथ हो जाती है।” उनका यह अंदाज आम यात्रियों के अनुभव से इतना मेल खाता है कि हजारों लोग इससे सहमति जता रहे हैं।

क्या कहती है रिपोर्ट?

लोकलसर्कल्स की एक रिपोर्ट के अनुसार:

  • 73% यात्रियों का टिकट सिर्फ एक मिनट में ही वेटिंग में चला जाता है।

  • 30% लोग अब एजेंट्स के भरोसे टिकट बुक करवाते हैं।

  • मात्र 29% यात्री ही साल में एक बार सफलतापूर्वक तत्काल टिकट बुक कर पाते हैं।

ये आंकड़े दिखाते हैं कि वर्तमान प्रणाली आम यूजर्स के लिए कितनी निराशाजनक है।

समाधान क्या है?

डॉ. वेलुमणि ने इस समस्या के समाधान के लिए एक स्लॉट-बेस्ड बुकिंग सिस्टम का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि जैसे उनकी कंपनी वेबसाइट पर ट्रैफिक को चरणबद्ध तरीके से संभालती है, वैसे ही IRCTC को भी तत्काल बुकिंग विंडो को समय के स्लॉट में बांट देना चाहिए।

उदाहरण के तौर पर:

  • सुबह 6 से रात 8 बजे तक

  • हर घंटे अलग-अलग रूट या ट्रेनों के लिए बुकिंग खोली जाए

 इससे क्या फायदे होंगे?

  • वेबसाइट पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा

  • साइट क्रैश की समस्या नहीं होगी

  • यात्रियों को फेयर और स्ट्रेस-फ्री मौका मिलेगा

  • एजेंट्स पर निर्भरता घटेगी

  • बुकिंग प्रक्रिया पारदर्शी और समावेशी बनेगी

 

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