राजीव आचार्य को मिला इंडियन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, पुस्तक “मेरी अयोध्या मेरा रघुवंश” को मिली ऐतिहासिक पहचान

Edited By Updated: 09 Feb, 2026 07:29 PM

rajeev acharya received the indian book of world records award

हाल ही में आयोजित एक भव्य एवं गरिमामय कार्यक्रम में प्रसिद्ध लेखक राजीव आचार्य को उनकी चर्चित पुस्तक “मेरी अयोध्या मेरा रघुवंश” के लिए नमस्कार ग्रुप इंडिया द्वारा इंडियन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड से सम्मानित किया गया। यह सम्मान साहित्य और संस्कृति के...

नेशनल डेस्क : हाल ही में आयोजित एक भव्य एवं गरिमामय कार्यक्रम में प्रसिद्ध लेखक राजीव आचार्य को उनकी चर्चित पुस्तक “मेरी अयोध्या मेरा रघुवंश” के लिए नमस्कार ग्रुप इंडिया द्वारा इंडियन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड से सम्मानित किया गया। यह सम्मान साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान को देखते हुए प्रदान किया गया। कार्यक्रम में साहित्य जगत की कई प्रतिष्ठित हस्तियों के साथ-साथ शिक्षाविद, लेखक, पत्रकार और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

इस अवसर पर सम्मान ग्रहण करते हुए राजीव आचार्य ने कहा कि उनकी पुस्तक “मेरी अयोध्या मेरा रघुवंश” केवल एक सामान्य धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह एक आत्मकथात्मक मैथोलॉजिकल (Mythological) कृति है, जिसमें भगवान श्रीराम की कथा को उनके रघुवंश के महान पूर्वजों के जीवन चरित्रों के साथ जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि इस पुस्तक में भगवान राम के साथ-साथ महाराज अज, रघु, दिलीप जैसे महान राजाओं की कथाओं को भी विस्तार से प्रस्तुत किया गया है।

राजीव आचार्य के अनुसार, इस पुस्तक की विशेषता यह है कि इसमें कथा को केवल वर्णनात्मक शैली में न रखकर संवादों (डायलॉग्स) के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है, जिससे पाठक कहानी से भावनात्मक रूप से जुड़ सकें। उन्होंने कहा,
“मेरा प्रयास यह रहा कि रामकथा और रघुवंश की परंपरा को आधुनिक पाठक के लिए सरल, रोचक और संवादात्मक रूप में प्रस्तुत किया जाए, ताकि युवा पीढ़ी भी इससे जुड़ सके।”

लेखक ने यह भी बताया कि अयोध्या केवल एक धार्मिक नगर नहीं है, बल्कि वह भारतीय संस्कृति, मर्यादा और आदर्शों की प्रतीक रही है। ‘मेरी अयोध्या मेरा रघुवंश’ पुस्तक के माध्यम से उन्होंने अयोध्या को केवल ऐतिहासिक दृष्टि से नहीं, बल्कि भावनात्मक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।

गौरतलब है कि राजीव आचार्य को इससे पहले भी साहित्यिक योगदान के लिए कई महत्वपूर्ण सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। उन्हें इस पुस्तक के लिए उत्तर प्रदेश सरकार का डॉ. शिव मंगल सिंह सुमन पुरस्कार भी मिल चुका है, जो साहित्य के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित सम्मान माना जाता है। इसके अतिरिक्त उन्हें विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं और मंचों द्वारा सम्मानित किया गया है।

राजीव आचार्य की अन्य चर्चित पुस्तकों में “रामचरितमानस और प्रबंधन नीति”, “देवयानी” तथा “राम की वनवास लीला” प्रमुख हैं। इन पुस्तकों का विमोचन उत्तर प्रदेश की माननीय राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल द्वारा किया गया था। ये सभी पुस्तकें पाठकों के बीच काफी लोकप्रिय रही हैं और धार्मिक साहित्य के साथ-साथ प्रबंधन, नीति और जीवन मूल्यों को जोड़ने का सफल प्रयास मानी जाती हैं।

विशेष रूप से “रामचरितमानस और प्रबंधन नीति” पुस्तक को एक अनोखी रचना माना जाता है, जिसमें तुलसीदास के रामचरितमानस को आधुनिक प्रबंधन सिद्धांतों से जोड़कर प्रस्तुत किया गया है। यह पुस्तक विद्यार्थियों, प्रबंधकों और शोधकर्ताओं के बीच विशेष रूप से चर्चित रही है।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अन्य साहित्यकारों और अतिथियों ने भी अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने कहा कि राजीव आचार्य की रचनाएं केवल धार्मिक आख्यान नहीं हैं, बल्कि वे भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और जीवन दर्शन को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत करती हैं। उनके लेखन में परंपरा और आधुनिकता का संतुलन स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

नमस्कार ग्रुप इंडिया के प्रतिनिधियों ने कहा कि राजीव आचार्य की पुस्तक “मेरी अयोध्या मेरा रघुवंश” भारतीय पौराणिक साहित्य को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती है और इसी कारण इसे इंडियन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की कृतियां आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक धरोहर का कार्य करेंगी।

कार्यक्रम के अंत में राजीव आचार्य ने सभी पाठकों, साहित्य प्रेमियों और आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उनके लिए प्रेरणा का स्रोत है और भविष्य में वे इसी तरह भारतीय संस्कृति और रामकथा पर आधारित और भी महत्वपूर्ण रचनाएं प्रस्तुत करते रहेंगे।

कुल मिलाकर, राजीव आचार्य को मिला यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत लेखन की उपलब्धि है, बल्कि यह भारतीय पौराणिक और सांस्कृतिक साहित्य की बढ़ती वैश्विक पहचान का भी प्रतीक है। उनकी पुस्तक “मेरी अयोध्या मेरा रघुवंश” आने वाले समय में साहित्य जगत में एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ के रूप में देखी जाएगी।

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