Edited By Anu Malhotra,Updated: 14 Jan, 2026 08:29 PM

जनवरी का महीना स्कूली बच्चों के लिए खुशियों की सौगात लेकर आया है। उत्तर भारत में जहां कड़ाके की ठंड और कोहरे के कारण छुट्टियां बढ़ाई गई हैं, वहीं दक्षिण भारत का एक राज्य ऐसा है जहाँ त्योहारों की धूम के कारण लगातार 5 दिनों तक स्कूल बंद रहने वाले हैं।...
नेशनल डेस्क: जनवरी का महीना स्कूली बच्चों के लिए खुशियों की सौगात लेकर आया है। उत्तर भारत में जहां कड़ाके की ठंड और कोहरे के कारण छुट्टियां बढ़ाई गई हैं, वहीं दक्षिण भारत का एक राज्य ऐसा है जहां त्योहारों की धूम के कारण लगातार 5 दिनों तक स्कूल बंद रहने वाले हैं। वह राज्य है तमिलनाडु। यहां पोंगल के महापर्व के अवसर पर 14 जनवरी से 18 जनवरी तक स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है।
यहां जानिए छुट्टियों का पूरा कैलेंडर और इसके पीछे की खास वजह:
तमिलनाडु में 5 दिनों की छुट्टियों का शेड्यूल
तमिलनाडु सरकार ने पोंगल उत्सव को देखते हुए शैक्षणिक संस्थानों के लिए विस्तृत अवकाश सूची जारी की है:
14 जनवरी (बुधवार) - भोगी पोंगल: यह पोंगल उत्सव की शुरुआत है। इस दिन पुरानी वस्तुओं को त्याग कर नई शुरुआत की जाती है। कई स्कूलों में इस दिन वैकल्पिक या पूर्ण अवकाश रहता है।
15 जनवरी (गुरुवार) - थाई पोंगल: यह मुख्य त्योहार है, जिसे उत्तर भारत में 'मकर संक्रांति' के रूप में मनाया जाता है। इस दिन सूर्य देव की पूजा होती है।
16 जनवरी (शुक्रवार) - मट्टू पोंगल / तिरुवल्लुवर जयंती: यह दिन पशुधन (गाय-बैल) की सेवा और महान तमिल कवि 'तिरुवल्लुवर' को समर्पित है।
17 जनवरी (शनिवार) - कनुम पोंगल / उझावर थिरुनल: यह दिन परिवार से मिलने-जुलने और किसानों के सम्मान का होता है। शनिवार होने के कारण भी यहाँ स्कूल बंद रहेंगे।
18 जनवरी (रविवार): साप्ताहिक अवकाश।
नोट: इस लंबी छुट्टी के बाद सभी स्कूल अब 19 जनवरी (सोमवार) को खुलेंगे।
पोंगल का महत्व और 'उबलते चावल' की परंपरा
पोंगल केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति और किसानों के प्रति आभार व्यक्त करने का जरिया है।
'पोंगल' शब्द का अर्थ होता है 'उबलना' या 'उफनना'।
परंपरा: नए मिट्टी के बर्तन में नए चावल, दूध और गुड़ डालकर पकाया जाता है। जब यह उफनकर बाहर गिरता है, तो उसे संपन्नता का प्रतीक माना जाता है। लोग 'पोंगोलो पोंगल' के जयकारे लगाते हैं, जिसका अर्थ है कि घर में सुख और समृद्धि का आगमन हो।
तिरुवल्लुवर जयंती: ज्ञान और भाषा का उत्सव
16 जनवरी को महान दार्शनिक तिरुवल्लुवर की जयंती भी है। हाल ही में शिक्षा मंत्रालय ने उनकी प्रसिद्ध कृति 'तिरुक्कुरल' को सांकेतिक भाषा (Sign Language) में भी लॉन्च किया है, ताकि इसे हर वर्ग तक पहुँचाया जा सके। सरकार का मानना है कि ऐसी महान कृतियाँ देश को भाषाई रूप से जोड़ने का काम करती हैं।