Edited By Parveen Kumar,Updated: 29 Mar, 2026 10:36 PM

उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में आयोजित एक कार्यक्रम ने एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मियों को तेज कर दिया है। ‘सनातन संवाद’ नाम से आयोजित इस कार्यक्रम में ब्राह्मण समाज को एकजुट करने का आह्वान किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व जगद्गुरु शंकराचार्य...
नेशनल डेस्क : उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में आयोजित एक कार्यक्रम ने एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मियों को तेज कर दिया है। ‘सनातन संवाद’ नाम से आयोजित इस कार्यक्रम में ब्राह्मण समाज को एकजुट करने का आह्वान किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने किया, जहां मंच से राज्य सरकार के खिलाफ कई तीखे बयान दिए गए और आगामी चुनाव को लेकर एकजुटता की अपील की गई।
जीआईसी मैदान बना राजनीतिक केंद्र
बस्ती के जीआईसी मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग जुटे। मंच से वक्ताओं ने राज्य की मौजूदा सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी ने भी खुले मंच से ब्राह्मण समाज से एकजुट होने और आगामी चुनाव में सरकार को चुनौती देने की अपील की। उनके बयान ने कार्यक्रम को और अधिक राजनीतिक रंग दे दिया।
नेताओं के बयानों से बढ़ा माहौल
कार्यक्रम में पूर्व पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने भी लोगों को संबोधित किया। उन्होंने अपने संबोधन में ब्राह्मण समाज की भूमिका और एकता पर जोर देते हुए जोशीले नारे लगाए, जिससे मौजूद लोगों में उत्साह देखा गया। मंच से दिए गए बयानों ने कार्यक्रम को पूरी तरह राजनीतिक दिशा दे दी।
शंकराचार्य ने सरकार पर लगाए आरोप
जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्य सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में सनातन और गौ संरक्षण के मुद्दों पर गंभीर होती, तो विपक्ष को इस पर सवाल उठाने का मौका नहीं मिलता। उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों को गौ संरक्षण जैसे मुद्दों पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।
चुनाव को लेकर दी चेतावनी
शंकराचार्य ने आगामी 2027 के चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि यदि कोई भी राजनीतिक दल गौ को ‘राष्ट्रमाता’ घोषित करने का मुद्दा नहीं उठाता है, तो वे स्वयं किसी प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतारने पर विचार कर सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने राज्य में पशु संरक्षण को लेकर भी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।
संवैधानिक पदों को लेकर भी उठाए सवाल
अपने संबोधन में शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संत और मुख्यमंत्री दोनों भूमिकाओं को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति द्वारा दो भूमिकाएं निभाना मर्यादा के अनुरूप नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि संतों को सरकारी पदों से दूर रहना चाहिए।