15000 रुपयों में घर जाकर करते थे सौदा, जांच की तो बताया लड़का है या लड़की? हैरान कर देगी...

Edited By Updated: 04 Jun, 2025 03:44 PM

they used to go to homes and do deals for 15000 rupees

'बेटी बचाओ' के नारों और सख्त कानूनों के बावजूद गुजरात में महिला भ्रूण हत्या का एक बेहद घिनौना और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अहमदाबाद जिले के बावला कस्बे में पुलिस ने एक ऐसे हाई-टेक गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो चुपचाप और सुनियोजित तरीके से पहले...

नेशनल डेस्क। 'बेटी बचाओ' के नारों और सख्त कानूनों के बावजूद गुजरात में महिला भ्रूण हत्या का एक बेहद घिनौना और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अहमदाबाद जिले के बावला कस्बे में पुलिस ने एक ऐसे हाई-टेक गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो चुपचाप और सुनियोजित तरीके से पहले महिला भ्रूण की पहचान करता था और फिर सीधे मरीजों के घर जाकर ही गर्भपात को अंजाम देता था।

गैंग का मास्टरमाइंड: नर्स और रेडियोलॉजिस्ट

इस पूरे अवैध रैकेट की कमान दो मुख्य आरोपी संभाले हुए थे। एक नर्स हेमलता दर्जी और एक रेडियोलॉजिस्ट हर्षद आचार्य। ये दोनों अहमदाबाद आणंद और वडोदरा जैसे शहरों में सक्रिय थे। पुलिस ने खुलासा किया है कि इस गिरोह ने अब तक कम से कम 25 भ्रूण टेस्ट किए हैं जिनमें से आठ भ्रूण महिला निकले। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन आठ में से पाँच महिला भ्रूणों का गर्भपात सीधे मरीजों के घरों में ही कराया गया।

घर पर होती थी जांच और गर्भपात

अहमदाबाद ग्रामीण पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, यह ऑपरेशन बेहद गोपनीय तरीके से किया जा रहा था। मरीज को किसी क्लिनिक जाने की ज़रूरत नहीं पड़ती थी। गिरोह की टीम खुद उनके घर जाती, खून के सैंपल लेती और उसी जगह गर्भपात को अंजाम दे देती थी।

 

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पुलिस के अनुसार अगर किसी महिला को गर्भपात के दौरान ज्यादा खून बहता तो हेमलता दर्जी वही दवाइयां इस्तेमाल करती थी जो उसने अपने पुराने प्राइवेट अस्पताल से चुराई थीं। वहीं रेडियोलॉजिस्ट हर्षद आचार्य भ्रूण का लिंग पहचानने का काम करता था।

कोडवर्ड्स में होता था लिंग का खुलासा

इस रैकेट में लिंग की पहचान के लिए बेहद सावधानीपूर्वक कोडवर्ड्स का इस्तेमाल होता था। पुलिस अधिकारी ने बताया, अगर आचार्य मुस्कुराकर आशीर्वाद कहता था तो इसका मतलब होता था कि भ्रूण पुरुष है लेकिन अगर वह गंभीर होकर 'ठीक थई जैशे' (सब ठीक हो जाएगा) कहे तो इसका मतलब होता था कि भ्रूण महिला है।

सिर्फ भरोसेमंद लोगों को मिलती थी सेवा, हर केस में 15,000 

पुलिस ने यह भी खुलासा किया कि यह गिरोह हर किसी को अपनी ये अवैध सेवा नहीं देता था। केवल भरोसेमंद जान-पहचान वाले लोगों को ही संपर्क में लिया जाता था। इस पूरे ऑपरेशन के दौरान हर केस में ₹15,000 लिए जाते थे जिसमें से ₹7,000 हेमलता दर्जी को मिलते थे और बाकी हर्षद आचार्य रखता था। आचार्य ने यह गोरखधंधा करीब डेढ़ साल पहले शुरू किया था।

पूछताछ में दोनों आरोपियों ने दावा किया कि उन्हें उन महिलाओं के नाम याद नहीं हैं जिनका गर्भपात उन्होंने कराया। हालांकि उन्हें वह मकान जरूर याद हैं जहाँ ये सब हुआ। पुलिस अब उन महिलाओं की भी तलाश कर रही है जिन्हें यह अवैध सेवा दी गई थी। यह मामला 'बेटी बचाओ' अभियान के सामने एक बड़ी चुनौती पेश करता है और समाज में गहराई तक बैठे लिंग भेद को उजागर करता है।

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