शादी से पहले गुपचुप क्यों लड़का-लड़की करवा रहे हैं ये टेस्ट? वजह जानकर उड़ जाएंगो होश

Edited By Updated: 06 Jan, 2026 04:46 PM

why are boys and girls secretly getting these tests done before marriage

शादी से पहले कपल अब सिर्फ हेल्थ डिस्कशन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भविष्य की प्लानिंग को ध्यान में रखते हुए फर्टिलिटी टेस्ट भी करा रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार ओपीडी में ऐसे युवाओं की संख्या बढ़ी है, जो शादी के बाद किसी अनचाही परेशानी से बचना चाहते...

नेशनल डेस्क : एक दौर था जब शादी से पहले लड़का-लड़की एक-दूसरे की सामान्य हेल्थ से जुड़ी बातें ही साझा करते थे, लेकिन अब यह सोच बदल रही है। आजकल कई कपल शादी से पहले पूरा हेल्थ चेकअप करवा रहे हैं और इनमें से कुछ युवा चुपचाप फर्टिलिटी टेस्ट भी करा रहे हैं। खास बात यह है कि अब इस मामले में पुरुष भी आगे आकर जांच करवा रहे हैं।

डॉक्टर्स का कहना है कि ओपीडी में ऐसे कपल्स की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो शादी के बाद किसी अनचाही परेशानी से बचने के लिए पहले ही फर्टिलिटी से जुड़ी जांच करवा लेना चाहते हैं। कई बार जांच के दौरान समस्या वहां सामने आती है, जहां इसकी उम्मीद सबसे कम होती है।

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दुनिया भर में घट रही है शुक्राणुओं की संख्या

फर्टिलिटी विशेषज्ञों के मुताबिक, पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या दुनिया भर में तेजी से घट रही है। एक बड़े अध्ययन के अनुसार, 1973 से 2018 के बीच पुरुषों में औसत स्पर्म काउंट में 50 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार प्रति मिलीलीटर 15 मिलियन स्पर्म को न्यूनतम सामान्य सीमा माना जाता है। पहले स्पर्म डोनेशन के लिए इससे कहीं ज्यादा संख्या जरूरी होती थी, लेकिन अब इतने अच्छे आंकड़े मिलना भी मुश्किल हो गया है।

अस्पतालों की ओपीडी में बढ़े नए कपल

गुरुग्राम समेत बड़े शहरों के अस्पतालों में ऐसे युवाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है जो शादी से पहले फर्टिलिटी टेस्ट करवा रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, कई मामलों में जांच के बाद यह सामने आया कि महिला की रिपोर्ट सामान्य थी, जबकि पुरुष में जन्मजात कारणों से स्पर्म काउंट कम पाया गया। कुछ मामलों में लड़कियां खुद शादी से पहले होने वाले जीवनसाथी से फर्टिलिटी टेस्ट कराने की मांग कर रही हैं। इससे साफ है कि अब युवा भविष्य को लेकर ज्यादा जागरूक और मानसिक रूप से तैयार होना चाहते हैं।

बांझपन सिर्फ महिलाओं की समस्या नहीं

आज भी समाज में बांझपन का ठीकरा ज्यादातर महिलाओं पर फोड़ा जाता है, लेकिन आंकड़े कुछ और ही कहानी बताते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, देश में कुल बांझपन के मामलों में करीब 40 प्रतिशत कारण पुरुष होते हैं, 40 प्रतिशत महिलाएं, 10 प्रतिशत दोनों पार्टनर और 10 प्रतिशत मामलों में वजह का पता ही नहीं चल पाता।

पुरुषों में इनफर्टिलिटी के प्रमुख कारण

डॉक्टर्स बताते हैं कि पुरुषों में बांझपन सिर्फ कम स्पर्म काउंट तक सीमित नहीं है। इसमें स्पर्म की गति (मोटिलिटी) और बनावट (मॉर्फोलॉजी) भी अहम भूमिका निभाती है। AIIMS की एक स्टडी के मुताबिक, पुरुष बांझपन के सामान्य कारणों में एजूस्पर्मिया (जब सैंपल में स्पर्म नहीं मिलते) और OATS सिंड्रोम शामिल हैं, जिसमें स्पर्म की संख्या, गति या आकार सामान्य से कम होता है।

लाइफस्टाइल और प्रदूषण भी जिम्मेदार

विशेषज्ञों का कहना है कि उम्र बढ़ने के साथ स्पर्म की गुणवत्ता कम होना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसे मेल बायोलॉजिकल क्लॉक कहा जाता है। इसके अलावा धूम्रपान, शराब, गलत खानपान, तनाव और लंबे समय तक काम करने की आदतें स्पर्म डीएनए को नुकसान पहुंचाती हैं। आज के समय में एयर पॉल्यूशन, केमिकल्स, माइक्रोप्लास्टिक, हार्मोन को बिगाड़ने वाले तत्व, कीटनाशक और भारी धातुएं भी पुरुषों की फर्टिलिटी पर बुरा असर डाल रही हैं। ये तत्व शरीर में फ्री रेडिकल्स बनाकर स्पर्म और टेस्टिस को नुकसान पहुंचाते हैं।

विशेषज्ञों की सलाह

डॉक्टर्स का कहना है कि शादी से पहले फर्टिलिटी टेस्ट कराना गलत नहीं है। इससे भविष्य में मानसिक तनाव और पारिवारिक दबाव से बचा जा सकता है। सही समय पर जांच और इलाज से कई समस्याओं का समाधान संभव है।


 

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