मिडिल ईस्ट में जंग... लेकिन भारत में क्यों सस्ता हो गया सोना, एक्सपर्ट्स ने बताई वजह

Edited By Updated: 14 Mar, 2026 05:13 PM

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मिडिल ईस्ट में ईरान से जुड़े युद्ध के बावजूद सोना और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है। आमतौर पर संकट के समय इनकी कीमतें बढ़ती हैं, लेकिन इस बार अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत अमेरिकी डॉलर और कच्चे तेल की कीमतों के असर से सोना-चांदी की...

नेशलन डेस्क :  मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान पर अमेरिका और इजरायल की ओर से लगातार हमले किए जा रहे हैं। इसके जवाब में ईरान भी ड्रोन हमलों के जरिए जवाबी कार्रवाई कर रहा है। इस संघर्ष को शुरू हुए करीब 12 दिन हो चुके हैं और पूरे क्षेत्र में तनाव बना हुआ है। आमतौर पर ऐसे हालात में निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर रुख करते हैं, जिससे सोना और चांदी की कीमतों में तेजी आती है। लेकिन इस बार स्थिति कुछ अलग दिखाई दे रही है, क्योंकि युद्ध के बावजूद इन दोनों धातुओं की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है।

संकट के समय आमतौर पर क्यों बढ़ती हैं कीमतें?

जब भी दुनिया में युद्ध, राजनीतिक तनाव या आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है, तब निवेशक शेयर बाजार जैसे जोखिम भरे विकल्पों से दूरी बनाकर सुरक्षित निवेश की तलाश करते हैं। सोना और चांदी को पारंपरिक रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है। इसलिए आम तौर पर ऐसे समय में इनकी मांग बढ़ जाती है और कीमतें तेजी से ऊपर जाती हैं। लेकिन मौजूदा हालात में यह पारंपरिक पैटर्न देखने को नहीं मिल रहा है।

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अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत में गिरावट

जब ईरान से जुड़ा यह संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था, उस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना लगभग 5416 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार कर रहा था। लेकिन मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ते तनाव के बावजूद इसकी कीमत घटकर लगभग 5108 डॉलर प्रति औंस तक आ गई है। यह गिरावट इस बात की ओर इशारा करती है कि फिलहाल वैश्विक बाजार में सोने की मांग उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ी है।

भारत में भी कम हुए सोने के दाम

अगर भारतीय बाजार की बात करें तो यहां भी सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 28 फरवरी को सोने का भाव करीब 1.67 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास था। लेकिन कुछ ही दिनों में इसकी कीमत घटकर लगभग 1.59 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई है। इससे साफ है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की चाल का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ रहा है।

चांदी की कीमतों में भी आई कमी

सोने की तरह चांदी की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई है। एमसीएक्स पर 28 फरवरी को चांदी लगभग 2.89 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर पर थी। लेकिन 13 मार्च तक इसकी कीमत गिरकर करीब 2.62 लाख रुपये प्रति किलो रह गई। यानी युद्ध के बावजूद चांदी की मांग में भी अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं देखी जा रही है।

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एक्सपर्ट्स की राय: डॉलर की मजबूती बनी वजह

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध जैसे हालात के बावजूद सोना और चांदी की कीमतों में कमजोरी की मुख्य वजह अमेरिकी डॉलर की मजबूती है। जब वैश्विक बाजार में डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य देशों के निवेशकों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है। इसके कारण कुछ समय के लिए सोना और चांदी की मांग में कमी आ जाती है। इस तरह देखा जाए तो बढ़ती तेल कीमतों और मजबूत डॉलर के प्रभाव ने फिलहाल सोना-चांदी की कीमतों को ऊपर जाने से रोक रखा है।

कच्चे तेल और डॉलर का असर

विशेषज्ञों के अनुसार मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। मजबूत डॉलर और ऊर्जा बाजार में अस्थिरता ने मिलकर फिलहाल सोना और चांदी की कीमतों की तेजी को रोक दिया है।

 


 

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