Edited By Mehak,Updated: 13 Oct, 2025 07:32 PM

भाई दूज, दिवाली के अगले दिन मनाया जाने वाला पर्व है, जिसमें बहनें भाई की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती हैं और माथे पर तिलक लगाती हैं। रक्षाबंधन और भाई दूज दोनों भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक हैं, लेकिन इनमें अंतर है। रक्षाबंधन में राखी बांधी जाती है...
नेशनल डेस्क : भाई-बहन के रिश्ते को समर्पित त्योहार 'भाई दूज' दिवाली के अगले दिन बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। भाई दूज और रक्षाबंधन, दोनों ही भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक हैं, लेकिन इन्हें मनाने का तरीका अलग है।
2025 में भाई दूज 23 अक्टूबर, गुरुवार को मनाया जाएगा। यह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को पड़ता है। इस वर्ष भाई दूज का शुभ मुहूर्त दोपहर 1:13 बजे से 3:28 बजे तक रहेगा। बहनें इस समय अपने भाई के माथे पर तिलक करती हैं, उन्हें भोजन कराती हैं और लंबी उम्र की प्रार्थना करती हैं।
रक्षाबंधन और भाई दूज में मुख्य अंतर यह है कि रक्षाबंधन में बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और भाई बहन को रक्षा का वचन देता है। जबकि भाई दूज में बहन भाई को तिलक लगाकर उसकी लंबी उम्र की कामना करती है। रक्षाबंधन श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है, वहीं भाई दूज कार्तिक मास की द्वितीया को दिवाली के बाद मनाया जाता है।
भाई दूज का पर्व न केवल भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करता है, बल्कि यह परिवार में सौहार्द और प्रेम को भी बढ़ाता है। इस दिन विशेष पूजा, तिलक और पारंपरिक भोजन का आयोजन किया जाता है। बहनों द्वारा किए गए ये शुभ कार्य भाई के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लाने का प्रतीक माने जाते हैं। इस प्रकार भाई दूज परिवार और समाज में भाई-बहन के अटूट प्रेम और सुरक्षा की भावना को बढ़ावा देने वाला एक महत्वपूर्ण पर्व है।