Edited By Mehak,Updated: 13 Oct, 2025 07:03 PM

धनतेरस, जिसे धनत्रयोदशी भी कहा जाता है, दिवाली महोत्सव का पहला दिन है और यह समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इस दिन लोग सोना, चांदी और नए...
नेशनल डेस्क : धनतेरस, जिसे धनत्रयोदशी भी कहा जाता है, दिवाली महोत्सव का पहला दिन है और इसे समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए इस दिन को धनतेरस कहा जाता है। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और चिकित्सा का देवता माना जाता है और इसलिए उन्हें विष्णु का अंशावतार भी कहा जाता है।
धनतेरस के दिन लोग नए बर्तन, सोना, चांदी और अन्य शुभ वस्तुएं खरीदते हैं, जिससे घर में समृद्धि और सुख-शांति आती है। उत्तर और पश्चिम भारत में यह त्योहार विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह केवल पूजा या सोना-चांदी खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि कई व्यापारिक समुदायों के लिए नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत का दिन भी माना जाता है। इसी दिन कई लोग नए व्यवसाय शुरू करते हैं या बड़ी खरीदारी करते हैं।
धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि और धन के देवता कुबेर की विशेष पूजा की जाती है। ऐसा करने से माना जाता है कि घर में धन, संपत्ति और स्वास्थ्य का प्रवाह बढ़ता है। इस दिन लोग दीपक जलाकर और घर की सफाई करके मां लक्ष्मी और कुबेर से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस प्रकार, धनतेरस सिर्फ धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि आर्थिक और स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण दिन है।