Edited By Mansa Devi,Updated: 19 Mar, 2026 05:40 PM

बचपन में सुनी गई “चंदा मामा” की कहानियों से लेकर पढ़ाई में चंद्रमा से जुड़े वैज्ञानिक नियमों तक, चांद हमेशा से लोगों की जिज्ञासा का केंद्र रहा है। आसमान में चमकता चांद सिर्फ सुंदरता का प्रतीक ही नहीं, बल्कि कई वैज्ञानिक रहस्यों से भी जुड़ा हुआ है।
नेशनल डेस्क: बचपन में सुनी गई “चंदा मामा” की कहानियों से लेकर पढ़ाई में चंद्रमा से जुड़े वैज्ञानिक नियमों तक, चांद हमेशा से लोगों की जिज्ञासा का केंद्र रहा है। आसमान में चमकता चांद सिर्फ सुंदरता का प्रतीक ही नहीं, बल्कि कई वैज्ञानिक रहस्यों से भी जुड़ा हुआ है। इन्हीं में से एक सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है कि कई बार चांद पूरा गोल दिखता है, तो कई बार आधा ही क्यों नजर आता है।
चंद्रमा का आकार और दूरी
वैज्ञानिकों के अनुसार चंद्रमा का आकार पृथ्वी की तुलना में काफी छोटा है। इसकी त्रिज्या लगभग 1,740 किलोमीटर है, जो पृथ्वी की चौड़ाई के एक तिहाई से भी कम है। अगर तुलना करें, तो पृथ्वी को एक सिक्के के बराबर मानें तो चंद्रमा एक छोटे दाने जैसा दिखाई देगा।
चंद्रमा पृथ्वी से औसतन करीब 3.84 लाख किलोमीटर दूर है। यह दूरी इतनी अधिक है कि पृथ्वी जैसे लगभग 30 ग्रह इसके बीच में समा सकते हैं। एक दिलचस्प बात यह भी है कि चंद्रमा हर साल धीरे-धीरे पृथ्वी से दूर जा रहा है, लगभग एक इंच प्रति वर्ष की दर से।
क्या चंद्रमा पर भी आते हैं भूकंप?
चंद्रमा पर भी भूकंप आते हैं, जिन्हें वैज्ञानिक “मूनक्वेक” कहते हैं। ये भूकंप पृथ्वी के मुकाबले कम तीव्र होते हैं, लेकिन ज्यादा समय तक चल सकते हैं। इनके पीछे कई कारण होते हैं, जैसे उल्कापिंडों का टकराना, तापमान में बड़ा बदलाव, पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण प्रभाव और चंद्रमा की आंतरिक संरचना। हालांकि ज्यादातर मूनक्वेक हल्के होते हैं, लेकिन कुछ स्थितियों में ये भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए चुनौती बन सकते हैं।
आधा चांद दिखने की असली वजह
चंद्रमा खुद से प्रकाश नहीं देता, बल्कि यह सूर्य की रोशनी को परावर्तित करता है। जब चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर घूमता है, तो उसकी स्थिति सूर्य और पृथ्वी के संबंध में बदलती रहती है। इसी कारण हमें चंद्रमा का अलग-अलग हिस्सा रोशन दिखाई देता है। जब चंद्रमा ऐसी स्थिति में होता है कि उसका आधा हिस्सा ही सूर्य की रोशनी से चमक रहा होता है और वही हिस्सा पृथ्वी से दिखाई देता है, तब हमें चांद आधा नजर आता है। यह स्थिति तब बनती है जब पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य के बीच का कोण लगभग 90 डिग्री होता है। इस अवस्था को चंद्रमा की “चौथाई अवस्था” कहा जाता है, जिसमें हमें उसका आधा भाग रोशन दिखाई देता है।
चंद्रमा की बदलती कलाएं
चंद्रमा के आकार में जो बदलाव हमें दिखते हैं, उन्हें उसकी “कलाएं” कहा जाता है। कभी पूरा चांद (पूर्णिमा), कभी आधा और कभी बिल्कुल पतला (अमावस्या के आसपास) दिखाई देना, यह सब इन्हीं कलाओं का परिणाम है।आखिर रात में कभी-कभी आधा ही क्यों दिखता है चांद? वजह जानकर रह जाएंगे हैरान