युद्ध के बीच ऐतिहासिक क्रैश, अब तक इतने गिर गए सोने-चांदी के दाम, जानें 5 बड़ी वजहे

Edited By Updated: 16 Mar, 2026 06:52 PM

gold and silver prices have fallen this much so far

युद्ध के बीच वैश्विक बाजार में मची उथल-पुथल से सोना और चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है।

Gold Silver Price Crash: वैश्विक तनाव के बावजूद भारतीय सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट का सिलसिला जारी है। सोमवार, 16 मार्च को बाजार खुलते ही सोने की कीमतों में जबरदस्त सेंधमारी देखने को मिली, जिससे खरीदारों में हलचल मच गई है। 

आज का भाव: सोने-चांदी की कीमतों में हाहाकार 

भारतीय सर्राफा बाजार (IBJA) के आंकड़ों के अनुसार, आज 24 कैरेट सोने की कीमत 1,963 रुपये प्रति 10 ग्राम तक गिर गई है। इसके साथ ही अब 10 ग्राम सोने का भाव 1,56,436 रुपये के स्तर पर आ गया है। चांदी की स्थिति और भी खराब रही, जहां प्रति किलो 7,695 रुपए की भारी कमी दर्ज की गई। वर्तमान में चांदी 2,52,793 रुपए प्रति किलो पर कारोबार कर रही है। 

16 मार्च तक का सफर: तेजी के बाद भारी गिरावट 

फरवरी के अंत से लेकर अब तक के रुझान बताते हैं कि बाजार अस्थिर बना हुआ है: 

27 फरवरी: सोना 1,59,097 रुपये पर बंद हुआ था। 

28 फरवरी: इजरायली हमले के बाद कीमतों में उछाल आया। 

मार्च का हाल: 1 मार्च से 16 मार्च के बीच सोना 2,661 रुपये और चांदी 15,107 रुपये तक टूट चुकी है। 

आखिर क्यों सस्ता हो रहा है सोना? 

केडिया कमोडिटीज के अध्यक्ष अजय केडिया के अनुसार, इस गिरावट के पीछे 5 प्रमुख कारण काम कर रहे हैं: 

1. सट्टेबाजों पर सख्ती: बाजार नियामक द्वारा मार्जिन मनी बढ़ाए जाने से सट्टेबाजों के लिए बाजार में बने रहना महंगा हो गया है। मार्जिन बढ़ने से बाजार से तरलता (Liquidity) कम हुई है, जिससे कीमतों में नरमी आई है। 

2. शेयर बाजार का दबाव (Margin Calls): युद्ध के कारण शेयर बाजारों में भारी बिकवाली हुई। निवेशक शेयरों में हुए नुकसान की भरपाई के लिए सोने में अपने मुनाफे को बेच रहे हैं (Profit Booking), जिससे सोने पर दबाव बढ़ा है। 

3. डॉलर इंडेक्स में मजबूती: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी डॉलर मजबूत हो रहा है। डॉलर महंगा होने से सोने की मांग कम हो जाती है, क्योंकि अन्य देशों के लिए इसे खरीदना महंगा हो जाता है। 

4. नए निवेश की कमी: कीमतों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद अब नए निवेशक बाजार में प्रवेश करने से कतरा रहे हैं। मांग में कमी के कारण कीमतें स्थिर या गिर रही हैं। 

5. युद्ध की 'प्राइसिंग इन': विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध शुरू होने पर जो तात्कालिक उछाल आया था, उसे बाजार ने अब पचा लिया है। अब बाजार युद्ध की खबरों के बजाय बुनियादी आर्थिक संकेतकों के आधार पर चल रहा है।

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