Edited By Radhika,Updated: 21 Jan, 2026 03:37 PM

स साल देश में 77 वां गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा। यह त्योहार देशभक्ति से भरपूर और हर्षोल्लास के मनाया जाता हैं। अगर इसके ऐतिहासिक महत्व की बात करें तो इस दिन देश का संविधान लागू हुआ था, लेकिन असल में 26 जनवरी से दो महीने पहले हमारा संविधान बनकर तैयार...
Republic Day History: इस साल देश में 77 वां गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा।यह त्योहार देशभक्ति से भरपूर और हर्षोल्लास के मनाया जाता हैं। अगर इसके ऐतिहासिक महत्व की बात करें तो इस दिन देश का संविधान लागू हुआ था, लेकिन असल में 26 जनवरी से दो महीने पहले हमारा संविधान बनकर तैयार हो चुका था। यहां पर सवाल उठता है कि दो महीने के इंतजार के बाद 26 जनवरी 1950 को संविधान क्यों लागू किया गया? आइए सवाल का जवाब जानते हैं-
संविधान निर्माण की यात्रा
भारतीय संविधान को तैयार करने में 2 साल, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा। डॉ. भीमराव आंबेडकर के नेतृत्व में संविधान सभा ने एक ऐसा दस्तावेज तैयार किया जो विविधता में एकता का प्रतीक बना। यह संविधान 26 नवंबर 1949 को ही बनकर तैयार हो गया था और इसे विधिवत रूप से अपना लिया गया था, लेकिन इसके पूर्ण क्रियान्वयन के लिए दो महीने का और इंतज़ार किया गया।

26 जनवरी की तारीख ही क्यों चुनी?
अक्सर यह सवाल उठता है कि जब संविधान नवंबर में तैयार था, तो उसे जनवरी में क्यों लागू किया गया? इसका जवाब हमारे स्वाधीनता आंदोलन के इतिहास में छिपा है। दरअसल, 26 जनवरी 1930 को लाहौर अधिवेशन के दौरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 'पूर्ण स्वराज' की घोषणा की थी। इस ऐतिहासिक दिन की अहमियत और क्रांतिकारियों के बलिदान को जीवित रखने के लिए ही 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू करने का फैसला लिया गया।
लोकतंत्र का सबसे बड़ा उत्सव
26 जनवरी 1950 को जैसे ही ध्वजारोहण हुआ, भारतीय गणराज्य के जन्म की औपचारिक घोषणा हुई। आज यह दिन केवल एक अवकाश नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। दिल्ली के कर्तव्य पथ पर निकलने वाली भव्य परेड, तीनों सेनाओं का शक्ति प्रदर्शन और राज्यों की सांस्कृतिक झांकियां हमारे राष्ट्रीय आत्मविश्वास को दुनिया के सामने पेश करती हैं।